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For An Exploitation Free World!



                   On International Women's Day

                           
       LONG LIVE WOMEN'S  STRUGGLE FOR                        EXPLOITATION-FREE WORLD!
     

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AI एआई माने आत्मा!..

                    AI एआई या आत्मा? हम तो बरसों से कहते आए थे, "मान लो, आत्मा होती है!" तब लोग मुस्कराकर कहते थे, "दिखाओ... कहाँ है आत्मा?" अब AI ने वही बता दिया कि नहीं?.. यह तो हम सब जानते हैं कि मनुष्य जो सोचता है, वह यह लिख देता है, वह लिख सकता है। जो कल्पना करता है, वह चित्र बना देता है। जो पूछता है, उसका उत्तर सजाकर सामने रख देता है। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि जब मनुष्य की सोच का प्रतिबिंब इतनी तेज़ी से सामने आ सकता है, तो मनुष्य के भीतर उस सोच को जन्म देने वाली सत्ता का कमाल कितना हो सकता है?.. क्या यह झूठ है, असंगत है?.. अब उन लोगों से पूछिए जो हर अदृश्य चीज़ को यह कहकर टाल देते थे, "जो दिखाई न दे, वह होता ही नहीं!" क्यों AI भी तो दिखाई नहीं देता!.. लेकिन दिखाई दिए बिना कर्म करता है कि नहीं?... ठीक वैसे ही... आत्मा भी है! दिखाई नहीं देता लेकिन अपने कर्म और अपने प्रभावों के आधार पर समझा जाता है! तो जनाब, बताइए AI आत्मा का वैज्ञानिक प्रमाण है कि नहीं?..🎆🎆  

मुर्गों ने जब बाँग देना छोड़ दिया..

                मत बनिए मुर्गा-मुर्गी! एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया।.. एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उस ने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, "तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मै तुम्हें मार डालूँगा।"  मुर्गे ने कहा, "ठीक है, सर, जो भी आप चाहते हैं, वैसा ही होगा !" सुबह , जैसे ही मुर्गे के बाँग का समय हुआ, मालिक ने देखा कि मुर्गा बाँग नहीं दे रहा है, लेकिन हमेशा की तरह, अपने पंख फड़फड़ा रहा है।  मालिक ने अगला आदेश जारी किया कि कल से तुम अपने पंख भी नहीं फड़फड़ाओगे, नहीं तो मैं वध कर दूँगा।  अगली सुबह, बाँग के समय, मुर्गे ने आज्ञा का पालन करते हुए अपने पंख नहीं फड़फड़ाए, लेकिन आदत से, मजबूर था, अपनी गर्दन को लंबा किया और उसे उठाया।  मालिक ने परेशान होकर अगला आदेश जारी कर दिया कि कल से गर्दन भी नहीं हिलनी चाहिए। अगले दिन मुर्गा चुपचाप मुर्गी बनकर सहमा रहा और कुछ नहीं किया।  मालिक ने सोचा ये तो बात नहीं बनी, इस बार मालिक ने भी कुछ ऐसा सोचा जो वास्तव में मुर्गे के लिए नामुमकिन था। मालिक ने कहा कि कल...

नाथ-सम्प्रदाय और गुरु गोरखनाथ का साहित्य

स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम  परीक्षा की तैयारी नाथ सम्प्रदाय   गोरखनाथ     हिंदी साहित्य में नाथ सम्प्रदाय और                 गोरखनाथ  का योगदान                                                   'ग्यान सरीखा गुरु न मिल्या...' (ज्ञान के समान कोई और गुरु नहीं मिलता...)                                  -- गोरखनाथ नाथ साहित्य को प्रायः आदिकालीन  हिन्दी साहित्य  की पूर्व-पीठिका के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।  रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' की अपेक्षा 'वीरगाथा काल' कहना कदाचित इसीलिए उचित समझा क्योंकि वे सिद्धों-नाथों की रचनाओं को 'साम्प्रदायिक' रचनाएं समझते थे। अपने 'हिंदी साहित्य का इतिहास' ...