online_classes चित्रलेखा उपन्यास: एक परिचय 'चित्रलेखा' हिन्दी साहित्य का एक ऐसा प्रसिद्ध उपन्यास है जिसकी प्रसिद्धि प्रेमचन्द के उपन्यास गोदान, फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास मैला आँचल, यशपाल के उपन्यास दिव्या आदि की तरह मानी जाती है। उपन्यास अपने प्रकाशन वर्ष सन् 1934 से ही यह चर्चा के केंद्र में रहा है। उपन्यास सामाजिक-आध्यात्मिक क्षेत्र के बहु-चर्चित मुद्दे- अध्यात्मवाद बनाम भौतिक जीवन को अत्यंत जीवन्त रूप में प्रस्तुत करता है। उपन्यास धर्म और समाज की पारम्परिक मान्यताओं को चुनौती देता है। सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में प्रचलित पाखण्डों पर चोट करने के कारण इसने साहित्यिक क्षेत्र में विशेष प्रसिद्धि पाई। चित्रलेखा उपन्यास को प्रसिद्ध फ्रेंच लेखक-उपन्यासकार और सन् 1921 के साहित्य का नोबेल पुरस्कार विजेता अनातोले फ्रांस के उपन्यास थॉयसि...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.