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ब्रह्मराक्षस योनि से मुक्ति कैसे?.सुनिए!.(2)

              ब्रह्मराक्षस की मुक्ति-कथा                   ब्रह्मराक्षस कविता   भारतीय पौराणिक और मिथकीय कथाओं के इतने जीवन्त और सारगर्भित संकेतार्थ रहे हैं कि सदियां बीत जाने के बावज़ूद लोकमानस में उनकी जड़ें जमी हुई हैं। व्यापक जनता उनसे प्रेरणा लेती है, उनमें अपने जीवन के संदेश पाती है।         ऐसे प्रसिद्ध और आकर्षक मिथकों में एक मिथक 'ब्रह्मराक्षस' है। हिंदी साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर गजानन माधव 'मुक्तिबोध' ने न केवल 'ब्रह्मराक्षस' शीर्षक एक प्रसिद्ध कविता लिखी है बल्कि अपनी अन्य कविताओं में भी ऐसे मिथकों का उपयोग किया है।        आइए, आपको इस जीवन्त मिथकीय चरित्र से आपका परिचय कराते हैं और आपसे पूछते हैं कि आपने अपने गाँवों/कस्बों/शहरों में ऐसे नायब चरित्र को देखा-सुना है या नहीं?..टिप्पणी/कमेंट में अपनी राय/जिज्ञासा लिखकर ब्रह्मराक्षस की अवधारणा और भी जीवन्त और रोचक बनाएँ!           कहते हैं प्राचीन काल में मध्यप्रदेश के एक गाँव मे...

'मुक्तिबोध' की कविता

  हिन्दी साहित्य     परीक्षा की तैयारी स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम सत्र     गजानन माधव 'मुक्तिबोध' की कविता                       'ब्रह्मराक्षस'                          गजानन माधव 'मुक्तिबोध'   हिंदी के ऐसे कवि हैं जिनकी कविताओं का मर्म भेदने के लिए कविता के शब्दों से अधिक मुक्तिबोध के मानस में उतरना पड़ता है। उनकी कविताओं के शब्द एक पर्दे की तरह हैं जिनको खोले बिना आप उनके पीछे का संसार नहीं देख सकते, उसके सौंदर्य को नहीं परख सकते। केवल शब्दों से उनके काव्य-सौंदर्य की थाह लगा लेना उसी तरह मुश्किल है जैसे किसी कमरे के पर्दे के बाहर से कमरे के भीतर की स्थितियों को जानने की कोशिश करना। उनके शब्द अनुमान का साधन मात्र हैं, प्रत्यक्ष का अनुभव कराने के साधन नहीं- उद्भ्रांत शब्दों के नए आवर्त में हर शब्द निज प्रति शब्द को भी काटता, वह रूप अपने बिंब से भी जूझ विकृताकार-कृति है बन रहा...               ...