हिन्दी साहित्य परीक्षा की तैयारी स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम सत्र गजानन माधव 'मुक्तिबोध' की कविता 'ब्रह्मराक्षस' गजानन माधव 'मुक्तिबोध' हिंदी के ऐसे कवि हैं जिनकी कविताओं का मर्म भेदने के लिए कविता के शब्दों से अधिक मुक्तिबोध के मानस में उतरना पड़ता है। उनकी कविताओं के शब्द एक पर्दे की तरह हैं जिनको खोले बिना आप उनके पीछे का संसार नहीं देख सकते, उसके सौंदर्य को नहीं परख सकते। केवल शब्दों से उनके काव्य-सौंदर्य की थाह लगा लेना उसी तरह मुश्किल है जैसे किसी कमरे के पर्दे के बाहर से कमरे के भीतर की स्थितियों को जानने की कोशिश करना। उनके शब्द अनुमान का साधन मात्र हैं, प्रत्यक्ष का अनुभव कराने के साधन नहीं- उद्भ्रांत शब्दों के नए आवर्त में हर शब्द निज प्रति शब्द को भी काटता, वह रूप अपने बिंब से भी जूझ विकृताकार-कृति है बन रहा... ...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.