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पतझड़ क्यों आता है?..

                        पतझड़ आता है..🌿 पतझड़ आता है पत्ते गिर जाते हैं कबीरदास कहते हैं~ 'टूटा पत्ता डाल से ले गई पवन उड़ाय। अब के बिछड़े न मिलें दूर पड़ेंगे जाय।।' यह मानव-जीवन की ही नहीं प्राणिमात्र की अपरंच समस्त जगत की नियति है, लेकिन यह अस्तित्व, यह होना क्या कम महत्त्वपूर्ण है?.. तो फिर क्यों मृत्यु को लेकर जितनी चिंताएँ कविताएँ, कहानियां सदियों से लिखी गईं, सुनी-सुनाई गईं मानवता को, धरती को सुखद, सुंदर, आनंदपूर्ण  बनाने के लिए नहीं लिखी, सुनी-सुनाई गईं?.. लेकिन क्या यह सत्य है? जो उत्तर देता है केवल गीता जैसे ग्रन्थों से ही नहीं अपने कर्मों से, आचरणों से भगवान बन जाता है कृष्ण कहलाता है!... 🌹🌹🙏🌹❤️🙏 🌹🌹

भगवान कहाँ-कहाँ नहीं हैं?

                भगवान कहाँ हैं?...                         तुम कहाँ कहाँ हो भगवन!                   तुम कहाँ कहाँ नहीं हो जो यहाँ नहीं हैं, वहीं हो तुम्हें कहाँ कहाँ सब ढूँढें पेड़ों में, पत्तों में, धागों में पत्थर में, सिंदूर में, क्या मन में भी तुमको ढूँढें? वे कहीं भी हैं मिल जाते नहीं जहाँ वहाँ भी आते कितने अजीब है भगवन हर जगह तुम्हें सब पाते! 🌹🌹🙏❤️🙏🌹🌹