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इंद्र की चुनौती और ब्रजलोक का उत्तर

                          मृत्युलोक  नहीं,           स्वर्गलोक है ब्रजलोक! हालाँकि ब्रज के लोग  कभी स्वयं को मृत्युलोक के वासी न मानते थे और न कहलाना पसंद ही करते थे लेकिन  इंद्रसभा ने इसे 'मृत्युलोक' घोषित कर रखा था और देवराज इंद्र ने इन्हें मृत्युलोक के वासी ही  बनाए रखने का पूरा इंतज़ाम कर रखा था!  इसीलिए बेमौसम अतिवृष्टि घनघोर बादल कड़कती बिजली और फिर एकाएक तेज बरसात इन्द्र का रौद्र रूप!.. यही नहीं इंद्रसभा के देवदूत जब ब्रज में आते तो यहाँ की खुशहाल जिंदगी को नारकीय बना जाते  वे मृत्युलोक की जगह इसे 'नर्कलोक' कहते और मजाक उड़ाते कहते, 'देखो ये हैं नर्कलोक के लोग!' सीधे-सच्चे ब्रजवासी मान भी लेते कि उनकी जिंदगी नर्क बनने के शायद वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं! वे इंद्र के देवदूतों के हर आदेश का पालन करते और इंद्र की प्रार्थना करते हुए कहते कि 'हे देवराज, अबकी वर्षाऋतु में हमारे स्वजनों और गौवंश को बचाए रखना, यमुना देवी के प्रकोप का भाजन हमें न होने देना!..' लेकिन ऐसा शायद ...