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क्या सचमुच गड्ढे में जा रहा है समाज?

                   बुरा बनता समाज                             कारण क्या हैं?                                                                                                         - विजय कुमार शर्मा क्या और भी बुरा बन रहा है समाज? - अक्सर ही यह सवाल आज हर व्यक्ति के मन में उठता है! अधिकांश लोगों का मन इसका एक ही उत्तर भी देता है- 'निश्चय ही!' क्यों? वही मन फिर उत्तर देता है- हमारा भारतीय समाज बदल ही नहीं रहा है बल्कि यह बहुत तेज गति से बदल रहा है। सन् 1990 के बाद समाज के बदलाव ने तेज गति पकड़ ली। यह दौर था नयी-नयी नीतियों के आगमन का, यह दौर था एलपीजी यानी लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन के आग...

विद्यार्थी, ऑनलाइन पढाई और सोशल मीडिया

                      सोशल मीडिया:               साहित्य और  सामाजिक-चेतना                                                   साहित्य और समाज का सम्बंध  चर्चा का एक पुराना विषय है! लेकिन समाज का दुर्भाग्य कहें कि साहित्य का, यह विषय आज भी जीवंत है और समाज का एक बड़ा हिस्सा साहित्य को 'मनोरंजन की चीज' से अधिक और कुछ नहीं मानता। शायद इसीलिए समाज में बहुत कम लोग हैं जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल साहित्य अध्ययन के लिए करते हैं। ज़्यादातर के लिए तो सोशल मीडिया मनोरंजन का एक साधन भर है। इसी कारण जब कोई गंभीर साहित्यिक चर्चा होती है, अधिक लोग उससे नहीं जुड़ते। विशेषकर यूट्यूब और फेसबुक का इस्तेमाल तो गप्पों और भौंडे मनोरंजन के लिए ही अधिक होता है। लेकिन जैसे साहित्य का समाज की चेतना के लिए उपयोग होता है, वैसे ही सोशल मीडिया का भी विद्याध्ययन और सामाजिक चेतना के विक...