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जानिए योगियों के नाथ-सम्प्रदाय को

नाथ सम्प्रदाय  और  गुरु  गोरखनाथ              नाथ-सम्प्रदाय: एक परिचय   अगर सिद्धों, नाथों, योगियों की वाणी और उनके क्रिया-कर्मों पर आप ध्यान दें तो वे पूरी तरह भौतिकवाद को महत्त्व देने वाले, पारलौकिक जगत को नकारने वाले प्रतीत होते हैं। वे ऐसे इहलौकिक कवि/विचारक हैं कि मूर्तिपूजा और पाखंड उनके सामने नतमस्तक दिखाई देता है। ये सारे कवि ललकारते हुए अपनी बात को सही 'सिद्ध' करते हैं, शरीर के भीतर ही आत्मा-,परमात्मा का अस्तित्व मानते हैं। इस तरह वे आज के तथाकथित 'हिन्दू' या 'सनातन' विचार के ख़िलाफ़ खड़े होते दिखाई देते हैं जिसे आज पुरजोर लगाकर प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल वे सही मायनों गौतम बुद्ध के अनुयायी हैं जिन्होंने 'सनातन' नहीं, 'परिवर्तन' को परम सत्य माना। दुर्भाग्य से आज गोरखनाथ के तथाकथित शिष्यगण उनके विचारों के उलट काम करने वाले, धार्मिक पाखंडों को बढ़ावा देने वाले हैं।            जानिए ऐसे नाथपंथी महान साहित्यिक विभूतियों का अवदान और विचार कीजिए उनके योग-जोग पर जो विरले ही कहीं दिखता...