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संयुक्त किसान मोर्चा (पंजाब) नहीं लड़ेगा चुनाव!

                        चुनावों से नहीं, आंदोलन से ही                     बदलेगी किसानों की तक़दीर ★ संयुक्त किसान मोर्चा नहीं लड़ेगा पंजाब विधानसभा चुनाव, एक दर्जन के लगभग बड़े संगठनों ने जनसंघर्ष जारी रखने का किया ऐलान। ★ चुनावो के लिए कोई भी व्यक्ति या संगठन SKM या 32 संगठनों का नाम प्रयोग न करें।       संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने स्पष्ट किया है कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे है।  यह जानकारी मोर्चा की 9 सदस्यीय समन्वय समिति के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल व डॉ.दर्शनपाल ने दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा जो देश भर में 400 से अधिक विभिन्न वैचारिक संगठनों का एक मंच है जो केवल किसानों के मुद्दों पर बना है। न तो चुनाव के बहिष्कार का कोई आह्वान नहीं है और न ही चुनाव लड़ने की कोई समझ बनी है।  उन्होंने कहा कि इसे लोगों ने सरकार से अपना अधिकार दिलाने के लिए बनाया है और तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद संघर्ष को स्थगित कर दिया गया ह...

बहाना न बनाए सरकार...

                जारी है किसान आंदोलन,                      जारी रहेगा! ★ विरोध कर रहे किसानों की लंबित मांगों के संबंध में स्वीकृति के किसी भी औपचारिक वार्ता के बिना भारत सरकार उन्हें मोर्चों पर बने रहने के लिए मजबूर कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि उनके पास विरोध कर रहे किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नहीं है - किसान सकारात्मक कार्रवाई और उनकी जायज़ मांगों को पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ★ भाजपा-जजपा नेताओं का बहिष्कार जारी है - उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला गांव में प्रवेश न कर सके, इसके लिए जींद (हरियाणा) के उचाना के धरौली खेड़ा गांव में बड़ी संख्या में किसान जमा हुए ★ जहाँ सरकार कह रही है कि उसके पास प्रदर्शनकारी किसानों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है, एसकेएम याद दिलाता है कि पिछले साल औपचारिक वार्ता के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर मौन धारण किया था - आंदोलन के पास सभी आंदोलन के वीर शहीदों का रिकॉर्ड हैं और शहीद...

और तेज होगा किसान आंदोलन!..

                  मशाल जल रही है,            जलती रहेगी! ★ एसकेएम ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड के संबंध में किसान आंदोलन की मांगों को पूरा करने के लिए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की घोषणा की - 12 अक्टूबर को पूरे भारत में प्रार्थना और श्रद्धांजलि सभाओं और मोमबत्ती मार्च के साथ शहीद किसान दिवस के रूप में चिह्नित किया जाएगा - 15 अक्टूबर को दशहरा के दिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के स्थानीय नेताओं का पुतला दहन - 18 अक्टूबर को पूरे देश में रेल रोको - 26 अक्टूबर को लखनऊ में महापंचायत ★ एसकेएम ने नोट किया कि आशीष मिश्रा टेनी आज पूछताछ के लिए पेश हुए - एसकेएम अजय मिश्रा टेनी सहित दोषियों की गिरफ्तारी की प्रतीक्षा कर रहा है ★ एसकेएम ने अज्ञात व्यक्तियों द्वारा महाराष्ट्र के किसान नेता सुभाष काकुस्ते पर हमले की निंदा की दिनाँक 9 अक्टूबर, 2021 को नई दिल्ली में प्रेस क्लब में एक विशेष रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, कई एसकेएम नेताओं ने मीडिया को संबोधित किया और लखीमपुर खीरी किसान...

किसान संसद ने पारित किए ये प्रस्ताव

                              22 और 23 जुलाई को                             किसान संसद द्वारा              पारित संकल्प एवं प्रस्ताव हिन्दी: 1. यह स्पष्ट करने के बाद कि एपीएमसी बाईपास अधिनियम के प्रावधानों को किसानों के हितों की कीमत पर कृषि व्यवसाय कंपनियों और व्यापारियों के पक्ष में तैयार किया गया है, मौजूदा विनियमन (रेगुलेशन) और निगरानी तंत्र को खत्म करके, और बड़े कॉर्पोरेट द्वारा कृषि बाजारों के प्रभुत्व को बढ़ावा देगा; 2. जून 2020 से जनवरी 2021 तक एपीएमसी बाईपास अधिनियम के संचालन के प्रतिकूल अनुभव को संज्ञान में लेने के बाद, जहां अपंजीकृत व्यापारियों द्वारा भुगतान न करने और धोखाधड़ी के कारण किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ, जहां अधिकांश एपीएमसी मंडियों में व्यापारियों और कंपनियों द्वारा खरीद में आधी हो गई है, और जहां बड़ी संख्या में एपीएमसी मंडियों को भारी नुकसान हुआ है जिससे वे बंद होने क...

तो सांसद-विधायकों से होगा सीधा टकराव?..

     काला कानून, कितना काला!                                                    लंबी लड़ाई के लिए                तैयार हो रहे किसान ★ भाजपा सांसद, विधायक व जनप्रतिनिधियों के दफ्तरों के सामने किसान जलाएंगे कानूनों की प्रतियां ★ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर किसानों द्वारा श्रद्धांजलि ★ पंजाब के दोआबा से किसानों का बड़ा जत्था आया ★ पंजाब में किसान आंदोलन के 8 महीने पूरे : 100 से ज्यादा जगह पक्के मोर्चे ★ किसानों की लंबे संघर्ष की तैयारी : सभी तरह के इंतजाम कर रहे किसान तीन कृषि कानूनो के खिलाफ  देश के किसानों की लंबी लड़ाई चल रही है। पंजाब का इस लड़ाई का अहम योगदान है। पिछले साल सितम्बर से पंजाब में मोर्चे लगने लग गए थे। आज पंजाब में आंदोलन शुरू हुए 8 महीने हो गए है। पंजाब के किसानों के संघर्ष का परिणाम है कि राज्य में किसी भी टोल प्लाजा पर टैक्स नहीं लिया जा रहा है। पंजाब क...

क्या है किसान आंदोलन को मजबूत करने की नई योजना?..

              क्या और व्यापक, और मजबूत होगा                                         किसान आंदोलन  संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में जारी किसान आंदोलन अब आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनने कोशिश कर रहा है। दिख रहा है कि अगर सरकार ऐसे ही आंदोलन की उपेक्षा करती रही तो किसान आंदोलन को जारी रखने के लिए न केवल उसे आम देशवासियों से जोड़ा जाएगा, बल्कि संघर्ष को भी और शक्तिशाली बनाया जाएगा। हरियाणा के किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद इसकी जरूरत और ज़्यादा बढ़ गई है। किसान आंदोलन इसके लिए खुद को न केवल और व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है बल्कि इसे समाज के वंचित वर्गों तक भी इसे ले जाने के लिए भी प्रयासरत है। शायद बुद्ध पूर्णिमा को मनाने का आह्वान भी इसकी एक क़वायद है!... देखें, संयुक्त किसान मोर्चा की नई प्रेस विज्ञप्ति: हरियाणा के हिसार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस ने हिंसक कार्रवाई की थी। इसमें अनेक किसानों को गहरी चोटें भी आई...

क्या बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अपराजेय हैं?

पुराने सवाल: क्या कुछ नए जवाब हैं?                किसान-मजदूर आंदोलन:       उठते सवाल, उभरते जवाब देश की आम जनता के सामने, विशेषकर किसान आंदोलन ने कुछ ज्वलंत सवाल खड़े हैं!...क्या मजदूर किसान आंदोलन से जुड़ जाएँ तो व्यवस्था परिवर्तन हो सकता है?... अभी तक के किसान आंदोलन का जनता पर वास्तव में क्या प्रभाव पड़ा है?...क्या हमारे देश में प्रवासी मजदूर, विदेश भेजे/जा रहे मजदूर संघर्ष में शामिल हो जाएं तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? आज़ादी के संघर्षों में ऐसे किसानों-मजदूरों का क्या कोई इतिहास है? उदारीकरण के इस दौर में क्या मजदूर परम्परागत मजदूर रह गया है? क्या उसका संगठित होना आज सम्भव रह गया है? क्या प्रवासी मजदूरों ने पिछले वर्षों की विभीषिका से कोई सबक लिया है? खासकर, कोरोना की विभीषिका से? मालिकों के सामने गिड़गिड़ाकर किसी भी तरह, किसी भी शर्त पर काम पाना या कुछ और?...क्या किसान आंदोलन से मजदूरों को कोई उम्मीद है? ...क्या श्रीलंका-बांग्लादेश आदि पड़ोसी देशों में पैदा हुए घटनाक्रम यहॉं के किसानों-मजदूरों, नौजवानों-बेरोजगारों कोई सबक सिखा र...

What is the biggest threat to peasants?..

        Farmers are facing multi-fold problems:                              Corona is just one! Indian people are facing many fold problems these days. Corona is one of them. Although it seems the biggest threat to people, yet they are facing other problems which threaten their life even more . One of these problems is anti-peasant new laws. Farmers are protesting against these three laws for more than four months on the borders of India's capital Delhi and are demanding to withdraw these farm bills. Under these circumstances five Indian States witnessed elections along with local body or Panchayat elections in its most populous state Uttar Pradesh. Ruling BJP at Centre had taken these elections very seriously, particularly West Bengal province was taken as its prestige. BJP lost WB, Tamilanadu and Kerala which is considered its big loss. Sanyukt Kisan Morcha or Joint Peasants' Front terms it...

अखिल गोगोई- किसान आंदोलन की एक नई परिभाषा

                       कौन हैं अखिल गोगोई?...     ★ अखिल गोगोई की जीत से असम में नई राजनीति का दौर शुरू हो, ★अखिल गोगोई की जीत से देश के किसान आंदोलन को बल मिलेगा।                             ~~~ डॉ. सुनीलम     असम के शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से अखिल गोगोई चुनाव जीत गए। 5 राज्यों में जहां भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां कोई ना कोई उम्मीदवार जीता है। लेकिन अखिल गोगोई की जीत विशेष महत्व रखती है। जीत का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि असम की भाजपा सरकार और  कॉर्पोरेट  की पूरी ताकत लगाने के बावजूद भी वे चुनाव जीते हैं, यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि वह डेढ़ वर्षो से जेल में बन्द होने और चौतरफा हमले के  बावजूद भी चुनाव जीते हैं।  असम सरकार ने उन पर यूएपीए लगाया है, एनआईए ने राष्ट्र द्रोह के प्रकरण तैयार किये हैं। तमाम मुकदमों में उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है लेकिन एनआईए कोर्ट उन्हें जमानत देने को तैयार नहीं है।...

किसान आंदोलन के नए प्रतिमान

                  दिल्ली की सीमाओं से आगे... संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में जारी किसान आंदोलन अब देशव्यापी होने साथ-साथ सघन भी होता जा रहा है। देश के दक्षिणी राज्यों- केरल, तमिलनाडु, गोवा आदि में अन्य किसानों के साथ-साथ मछुआरों का भी आंदोलन को भारी समर्थन मिल रहा है। होली के अवसर पर किसानों ने जगह-जगह किसान-विरोधी कानूनों की प्रतियां जलाईं। इसी क्रम में किसान आंदोलन के 125वें दिन जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति से पता चलता है कि यह आंदोलन अब विकेन्द्रित आंदोलन के रूप में कहीं ज़्यादा गति से विकसित हो रहा है।     कानूनों की जली होली 125वें दिन डॉ. दर्शनपाल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा निम्नलिखित निर्णय लिए गए:- 1. 5 अप्रैल को FCI बचाओ दिवस मनाया जाएगा जिस दिन देशभर में FCI के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा। 2. 10 अप्रैल को 24 घण्टो के लिए केएमपी ब्लॉक किया जाएगा। 3. 13 अप्रैल को वैशाखी का त्यौहार दिल्ली की सीमाओं पर मनाया जाएगा। 4. 14 अप्रैल को डॉ भीम राव अम्बेडकर की जयंती पर सविंधान बचाओ दिवस मनाया ज...

व्यापक हो रहा है किसान आंदोलन

काले कानून                       रोज़-रोज़ और तेज... और व्यापक हो रहा है  किसान आंदोलन                     दिल्ली बॉर्डर से शुरू हुआ किसान आंदोलन रोज़-रोज़ और तेज, और व्यापक होता जा रहा है। एक तरफ़ जहाँ केंद्र सरकार किसान आंदोलन के प्रति ऐसा व्यवहार प्रकट कर रही है जैसे इस आंदोलन से उस पर कोई फर्क़ नहीं पड़ने वाला, वहीं दूसरी तरफ़ किसान आंदोलन के चार महीने पूरे होने पर 26 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से यह पता चलता है कि किसान आंदोलन अब और व्यापक होते हुए कस्बों-गाँवों तक फैलने तथा और सुदृढ़ होने लगा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता/प्रवक्ता डॉ. दर्शनपाल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पूरी पढ़ने पर इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है: बढ़ता जा रहा किसान आंदोलन     "सयुंक्त किसान मोर्चा सभी किसानों-मजदूरों व आम जनता को आज के भारत बंद की सफलता की बधाई देता है। गुजरात के किसानों के साथ संघर्ष में पहुंचे किसान नेता युद्धवीर सिंह को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार क...