वे हमें चोर समझते हैं!.. - अशोक प्रकाश वे हमें चोर समझते हैं!... वे, जिनकी चोरी की समानान्तर व्यवस्था पूरे समाज में बदबू की तरह फैली है... वे, जो अंग्रेजों के दलालों के रूप में हमारे देश और उसकी भोली-भाली जनता को गुलाम बनाए रखे रहे उसका खून चूसा... वे, जो खुद बंगलों में रहते रहे और झोपड़ियों को खाक में मिलाते रहे... वे, जो रोब-दाब मतलब शोषण और अत्याचार के पर्याय हैं वे, 'आखर का उजियारा फैलाने वाले' देश के भविष्य की उम्मीद शिक्षक को चोर समझते हैं!... पूंजी के संचार माध्यमों से शिक्षकों को बदनाम करने वालों असली चोरों के असली सरदारों, समाज की चेतना के वाहक शिक्षक भी तुम्हें अच्छी तरह समझते हैं!... ...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.