Skip to main content

Posts

Showing posts with the label krishna

कृष्ण-कथा: हर लेती मन की व्यथा

                          भांडीर वन में                 राधा-कृष्ण के प्रथम मिलन की कथा           भांडीरवन की दोपहर थी! सूर्य आकाश के मध्य मानो ठहर-सा गया था।...  यमुना की ओर से आती मंद पवन वृक्षों के पत्तों को धीरे-धीरे हिला रही थी। गायें हरी घास चर रही थीं और ग्वालबाल भोजन करके इधर-उधर विश्राम कर रहे थे। कदम्ब के विशाल वृक्ष के नीचे बालकृष्ण लेटे थे। सिर के नीचे अपनी भुजा रखे, अधरों पर हल्की मुस्कान लिए उन्होंने आंखें मूँद लीं। उनके मन में बीते हुए कल की एक मधुर लहर उठने लगी।.. कल प्रातः उन्होंने पहली बार उस गौरवर्णी किशोरी को देखा था। यमुना तट पर खड़ी वह अपने सखियों के साथ पुष्प चुन रही थी। क्षणभर के लिए दोनों की दृष्टियाँ मिली थीं। न कोई परिचय हुआ, न कोई संवाद, किन्तु वह एक क्षण जैसे अनन्त बन गया। आज उसी स्मृति ने कृष्ण के हृदय में अपना घर बना लिया था। उन्होंने मन ही मन सोचा, "वह कौन थी? उसकी आँखों में ऐसा अपनापन क्यों था, मानो युगों से जानता हू...

इंद्र की चुनौती और ब्रजलोक का उत्तर

                          मृत्युलोक  नहीं,           स्वर्गलोक है ब्रजलोक! हालाँकि ब्रज के लोग  कभी स्वयं को मृत्युलोक के वासी न मानते थे और न कहलाना पसंद ही करते थे लेकिन  इंद्रसभा ने इसे 'मृत्युलोक' घोषित कर रखा था और देवराज इंद्र ने इन्हें मृत्युलोक के वासी ही  बनाए रखने का पूरा इंतज़ाम कर रखा था!  इसीलिए बेमौसम अतिवृष्टि घनघोर बादल कड़कती बिजली और फिर एकाएक तेज बरसात इन्द्र का रौद्र रूप!.. यही नहीं इंद्रसभा के देवदूत जब ब्रज में आते तो यहाँ की खुशहाल जिंदगी को नारकीय बना जाते  वे मृत्युलोक की जगह इसे 'नर्कलोक' कहते और मजाक उड़ाते कहते, 'देखो ये हैं नर्कलोक के लोग!' सीधे-सच्चे ब्रजवासी मान भी लेते कि उनकी जिंदगी नर्क बनने के शायद वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं! वे इंद्र के देवदूतों के हर आदेश का पालन करते और इंद्र की प्रार्थना करते हुए कहते कि 'हे देवराज, अबकी वर्षाऋतु में हमारे स्वजनों और गौवंश को बचाए रखना, यमुना देवी के प्रकोप का भाजन हमें न होने देना!..' लेकिन ऐसा शायद ...

चन्द्र और सूर्य से किसकी तुलना की जा सकती है?

                  भगवान श्रीकृष्ण:                     चन्द्र है या सूर्य?                   भगवान श्रीकृष्ण स्तुति   रात को, चाँद को दीपक दिखाना चलता है, सूर्य को दीपक दिखाना अच्छा नहीं है खलता है! अगर कहीं सूर्य और चन्द्र एक साथ दिख रहे हों किसी को, कृष्णचन्द्र हैं वे सूर्य को भी जिनके आगे झुकना पड़ता है! 🌹🙏❤️🙏🌹