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मृत्युलोक के विद्रोही (1)

                मृत्युलोक में  नहीं है ब्रजलोक! हालाँकि ब्रज के लोग  कभी स्वयं को मृत्युलोक के वासी न मानते थे और न कहलाना पसंद ही करते थे लेकिन  इंद्रसभा ने इसे 'मृत्युलोक' घोषित कर रखा था और देवराज इंद्र ने इन्हें मृत्युलोक के वासी ही  बनाए रखने का पूरा इंतज़ाम कर रखा था!  इंद्रसभा के देवदूत जब यहॉं आते तो यहाँ की खुशहाल जिंदगी को नारकीय बना जाते  वे मृत्युलोक की जगह इसे 'नर्कलोक' कहते और मजाक उड़ाते कहते, 'देखो ये हैं नर्कलोक के लोग!' सीधे-सच्चे ब्रजवासी मान भी लेते कि उनकी जिंदगी नर्क बनने के शायद वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं! वे इंद्र के देवदूतों के हर आदेश का पालन करते और इंद्र की प्रार्थना करते हुए कहते कि 'हे देवराज, अबकी वर्षाऋतु में हमारे स्वजनों और गौवंश को बचाए रखना, यमुना देवी के प्रकोप का भाजन हमें न होने देना!..' लेकिन ऐसा शायद ही किसी वर्ष हुआ हो जब वर्षाऋतु के बाद उनके सभी स्वजन और गौवंश सुरक्षित बच निकले हों! अपने से भी अधिक चिंता ब्रजवासियों को अपने गौवंश की होती, क्योंकि गायें और गौवंश उनके ब्रज के जीवन...