ब्रह्मराक्षस की मुक्ति-कथा ब्रह्मराक्षस कविता भारतीय पौराणिक और मिथकीय कथाओं के इतने जीवन्त और सारगर्भित संकेतार्थ रहे हैं कि सदियां बीत जाने के बावज़ूद लोकमानस में उनकी जड़ें जमी हुई हैं। व्यापक जनता उनसे प्रेरणा लेती है, उनमें अपने जीवन के संदेश पाती है। ऐसे प्रसिद्ध और आकर्षक मिथकों में एक मिथक 'ब्रह्मराक्षस' है। हिंदी साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर गजानन माधव 'मुक्तिबोध' ने न केवल 'ब्रह्मराक्षस' शीर्षक एक प्रसिद्ध कविता लिखी है बल्कि अपनी अन्य कविताओं में भी ऐसे मिथकों का उपयोग किया है। आइए, आपको इस जीवन्त मिथकीय चरित्र से आपका परिचय कराते हैं और आपसे पूछते हैं कि आपने अपने गाँवों/कस्बों/शहरों में ऐसे नायब चरित्र को देखा-सुना है या नहीं?..टिप्पणी/कमेंट में अपनी राय/जिज्ञासा लिखकर ब्रह्मराक्षस की अवधारणा और भी जीवन्त और रोचक बनाएँ! कहते हैं प्राचीन काल में मध्यप्रदेश के एक गाँव में एक विशाल पीप...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.