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Showing posts from June, 2026

कृष्ण-कथा: हर लेती मन की व्यथा

                          भांडीर वन में                 राधा-कृष्ण के प्रथम मिलन की कथा           भांडीरवन की दोपहर थी! सूर्य आकाश के मध्य मानो ठहर-सा गया था।...  यमुना की ओर से आती मंद पवन वृक्षों के पत्तों को धीरे-धीरे हिला रही थी। गायें हरी घास चर रही थीं और ग्वालबाल भोजन करके इधर-उधर विश्राम कर रहे थे। कदम्ब के विशाल वृक्ष के नीचे बालकृष्ण लेटे थे। सिर के नीचे अपनी भुजा रखे, अधरों पर हल्की मुस्कान लिए उन्होंने आंखें मूँद लीं। उनके मन में बीते हुए कल की एक मधुर लहर उठने लगी।.. कल प्रातः उन्होंने पहली बार उस गौरवर्णी किशोरी को देखा था। यमुना तट पर खड़ी वह अपने सखियों के साथ पुष्प चुन रही थी। क्षणभर के लिए दोनों की दृष्टियाँ मिली थीं। न कोई परिचय हुआ, न कोई संवाद, किन्तु वह एक क्षण जैसे अनन्त बन गया। आज उसी स्मृति ने कृष्ण के हृदय में अपना घर बना लिया था। उन्होंने मन ही मन सोचा, "वह कौन थी? उसकी आँखों में ऐसा अपनापन क्यों था, मानो युगों से जानता हू...