पतझड़ आता है..🌿 पतझड़ आता है पत्ते गिर जाते हैं कबीरदास कहते हैं~ 'टूटा पत्ता डाल से ले गई पवन उड़ाय। अब के बिछड़े न मिलें दूर पड़ेंगे जाय।।' यह मानव-जीवन की ही नहीं प्राणिमात्र की अपरंच समस्त जगत की नियति है, लेकिन यह अस्तित्व, यह होना क्या कम महत्त्वपूर्ण है?.. तो फिर क्यों मृत्यु को लेकर जितनी चिंताएँ कविताएँ, कहानियां सदियों से लिखी गईं, सुनी-सुनाई गईं मानवता को, धरती को सुखद, सुंदर, आनंदपूर्ण बनाने के लिए नहीं लिखी, सुनी-सुनाई गईं?.. लेकिन क्या यह सत्य है? जो उत्तर देता है केवल गीता जैसे ग्रन्थों से ही नहीं अपने कर्मों से, आचरणों से भगवान बन जाता है कृष्ण कहलाता है!... 🌹🌹🙏🌹❤️🙏 🌹🌹
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.