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क्यों होते हैं यौन-हिंसा पर चुनिंदा विरोध-प्रदर्शन?..

                स्त्रियों के विरुद्ध बढ़ते अपराध                        हत्या-बलात्कार के मुख्य कारण                               ~ अशोक प्रकाश कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी महिला डाक्टर से बलात्कार और हत्या के समाचारों ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया। इस जघन्य अपराध के खिलाफ़ यह प्रतिक्रिया उचित भी थी और जरूरी भी। इसे निर्भया-2 भी कहा गया। हमारा पुरुषप्रधान समाज जिस तरह कुंठित जीवन जीता है, विशेषकर स्त्री और यौन-संबंधों के मामले में, वहाँ इस तरह के अपराध अब समाज की प्रकृति बन गए हैं। पश्चिमी देशों में अश्लीलता को लेकर स्यापा करने वाले तथाकथित 'सनातनी' अपने देश में ऐसे अपराधों के लिए भी 'पश्चिम की संस्कृति' को दोषी ठहराते देखे जा सकते हैं। लेकिन, दरअसल यह अपने समाज के अपराध को छुपाने की एक प्रवृत्ति है। यौन अपराध छिपाने की इस प्रवृत्ति से यह खत्म होने या कम होने के बजाय और बढ़ती है। लेकिन...

कोलकाता: हत्या-बलात्कार की रातों का अंत कब?

      असली गुनहगार का अंत                  कब होगा?  लोगों की जान बचाने के लिए वह रात में 'ऑन कॉल' ड्यूटी पर थी, लेकिन वह खुद को दरिंदो से बचाने में नाकाम रही! उसके पिता ने उसे नग्न अवस्था में फर्श पर पड़ा हुआ पाया, उसकी Pelvic Bone (कूल्हे की हड्डी) टूटी हुई थी, हाथ-पैर विकृत थे और उसकी आंखों में चश्मे के टुकड़े टूटे हुए थे और लगातार खून बह रहा था। उन अंतिम क्षणों में उसकी दुर्दशा अकल्पनीय है। उसके माता-पिता को अपराध स्थल पर पहुंचने के 3 घंटे बाद तक उसके शव से संपर्क करने से मना कर दिया गया। उसके शरीर में 100 ग्राम semen पाया गया। एक बलि का बकरा हिरासत में है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि वह मानसिक रोगी थी और सुसाइड कर ली है।उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और अगले दिन उन्हें एक बड़े मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त किया गया। सीबीआई को ट्रांसफर होने के बाद अस्पताल में रेनोवेशन का काम शुरू हुआ। इस बिंदु पर अब यह केवल डॉक्टर का मामला नहीं रह गया है, यह सिर्फ अमानवीय है। हम साल-दर-साल अमानवीयता के निचले...

प्रेम निषिद्ध है यहॉं!..

                                                     इन्हें  बचाओ!...                                   ~ अशोक प्रकाश          ये दोनों  सच्ची घटनाएं हैं!...आपके आसपास भी घटती होंगी। किन्तु ये आकस्मिक घटनाएं नहीं हैं। ये उस समाज की सच्चाइयाँ हैं जिसके रचयिता भी हम हैं, भोक्ता भी हम हैं। ऐसी व्यवस्था बनाने या बनाए रखने में हमारा भी योगदान है!...              पहली घटना एक लड़की की है! इस लड़की की उम्र होगी 18-20 साल। कुुुछ दिन पहले खबर थी कि इसका अपहरण हो गया है। माँ-बाप के साथ सब चिंतित थे। नाते-रिस्तेेेदार, अड़ोसी-पड़ोसी, दोस्त-यार!...क्या हुआ?  अभी भी कोई ज़्यादा नहीं जानता! पहले पता चला कि इस शहर से बाहर एक उत्तरी शहर में उसकी लोकेशन मिल रही. उधर कोई इसके रिश्तेदार रहते हैं. लोग गए तो पता लगा क...