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क्या जानते हैं आप द्वादश ज्योतिर्लिंग के बारे में?..

                   भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग       हमारे देश के द्वादश ज्योतिर्लिंग हमारे देश में, विशेषकर हिन्दू या सनातन धर्मावलम्बियों के बीच भगवान शिव के 12 अत्यंत पवित्र ज्योतिर्लिंग अत्यंत महत्वपूर्ण और विख्यात हैं। ये ज्योतिर्लिंग शिवजी की विभिन्न भावभंगिमाओं के दर्शन कराते हैं। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित होने के कारण इनकी स्थानीय विशेषताएं और पूजन पद्धतियों के चलते भी इन सबका विशिष्ट महत्त्व है। ये ज्योतिर्लिंग गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में फैले हुए हैं। प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ (गुजरात), केदारनाथ (उत्तराखंड), काशी-विश्वनाथ (वाराणसी) और महाकालेश्वर (उज्जैन) शामिल हैं जहाँ साल भर भक्तों का मेला लगा रहता है।             द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान 1. सोमनाथ (Somnath): सौराष्ट्रगुजरात 2. मल्लिकार्जुन (Mallikarjun): श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश 3. महाकालेश्वर (Mahakaleshwar): उज्जैन, मध...
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चन्द्र और सूर्य से किसकी तुलना की जा सकती है?

                  भगवान श्रीकृष्ण:                     चन्द्र है या सूर्य?                   भगवान श्रीकृष्ण स्तुति   रात को, चाँद को दीपक दिखाना चलता है, सूर्य को दीपक दिखाना अच्छा नहीं है खलता है! अगर कहीं सूर्य और चन्द्र एक साथ दिख रहे हों किसी को, कृष्णचन्द्र हैं वे सूर्य को भी जिनके आगे झुकना पड़ता है! 🌹🙏❤️🙏🌹

पतझड़ क्यों आता है?..

                        पतझड़ आता है..🌿 पतझड़ आता है पत्ते गिर जाते हैं कबीरदास कहते हैं~ 'टूटा पत्ता डाल से ले गई पवन उड़ाय। अब के बिछड़े न मिलें दूर पड़ेंगे जाय।।' यह मानव-जीवन की ही नहीं प्राणिमात्र की अपरंच समस्त जगत की नियति है, लेकिन यह अस्तित्व, यह होना क्या कम महत्त्वपूर्ण है?.. तो फिर क्यों मृत्यु को लेकर जितनी चिंताएँ कविताएँ, कहानियां सदियों से लिखी गईं, सुनी-सुनाई गईं मानवता को, धरती को सुखद, सुंदर, आनंदपूर्ण  बनाने के लिए नहीं लिखी, सुनी-सुनाई गईं?.. लेकिन क्या यह सत्य है? जो उत्तर देता है केवल गीता जैसे ग्रन्थों से ही नहीं अपने कर्मों से, आचरणों से भगवान बन जाता है कृष्ण कहलाता है!... 🌹🌹🙏🌹❤️🙏 🌹🌹

भगवान कहाँ-कहाँ नहीं हैं?

                भगवान कहाँ हैं?...                         तुम कहाँ कहाँ हो भगवन!                   तुम कहाँ कहाँ नहीं हो जो यहाँ नहीं हैं, वहीं हो तुम्हें कहाँ कहाँ सब ढूँढें पेड़ों में, पत्तों में, धागों में पत्थर में, सिंदूर में, क्या मन में भी तुमको ढूँढें? वे कहीं भी हैं मिल जाते नहीं जहाँ वहाँ भी आते कितने अजीब है भगवन हर जगह तुम्हें सब पाते! 🌹🌹🙏❤️🙏🌹🌹

कहानी माँ कालिका और च्यवन ऋषि की

        कालिकन धाम की माँ कालिका                 और  च्यवन ऋषि   प्राचीन अवध प्रांत अपने महान राजाओं और भगवान श्रीराम के कारण से विशेष प्रसिद्ध रहा है। उसकी प्रसिद्धि का एक अन्य कारण गांव-गांव, छोटे-मोटे नगरों में विविध मंदिरों का होना भी है। ये मंदिर प्रायः स्थानीय या ग्राम-देवियों/देवताओं के केंद्र हैं। ग्रामीण जनता के लिए ये धार्मिक आस्था/प्रार्थना-केंद्र, शांतिस्थल, मेलाकेन्द्र आदि के रूप में रहे हैं। इन्हीं मंदिरों में एक विशिष्ट मन्दिर आधुनिक अमेठी जनपद/नगर से 12 किलोमीटर दूर संग्रामपुर में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इसे कालिकन धाम मन्दिर के नाम से जाना जाता है। लोगों की मान्यता है कि यहाँ की कालिका माँ के दर्शन मात्र से ही भक्तों की हर इच्छा पूरी हो जाती है। नवरात्रि आने पर तो माँ के मंदिर को विशेष रूप से सजाकर तैयार किया जाता है। मां कालिकन मंदिर अपने चमत्कार के लिए जाना जाता है। यह धाम अमेठी के संग्रामपुर ब्लॉक के भौंसिंह पुर गाँव में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहां मौजूद कुंड में स्नान करने से आंखों से...

सहकारिता या अधिकारिता?..

  #ncp_2025 :                राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025                        एक-एक कर            सब हड़पने की नीति संयुक्त किसान मोर्चा, एसकेएम केंद्र की राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का विरोध क्यों कर रहा है? कई किसान संगठनों का राष्ट्रीय गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा, का दावा है कि एनसीपी 2025 संविधान के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और कृषि में निगमों के पिछले दरवाजे से प्रवेश को सुगम बनाती है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 की किसान संघों ने तीखी आलोचना की है।  संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि यह नीति सहकारी समितियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने का प्रयास करके संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है, जो संवैधानिक रूप से राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। इसके अलावा, एसकेएम का आरोप है कि एनसीपी 2025 में किसानों, श्रमिकों और हाशिए के समुदायों के अधिकारों और आजीविका ...

भाई/बहन के घर जाओ, अकाल-मृत्य भय से अभय हो जाओ!

                             भैया-दूज:         अकाल-मृत्य भय से अ भय होने का दिन                              ~ आचार्य कृष्णानंद स्वामी हमारे देश के सभी त्यौहार सामाजिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के त्यौहार है। पारिवारिक नातों-रिश्तों के साथ सामाजिक एकजुटता और भाईचारे के भी ये त्यौहार प्रतीक हैं। सभी त्यौहारों के पीछे कोई न कोई एक मिथकीय पारम्परिक कथा जुड़ी है जिसके सहारे शिक्षित-अशिक्षित जन-सामान्य इन त्यौहारों से भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। इन कथाओं में सामाजिक प्रेरणाएँ निहित हैं जो जीवन में खुशियां लाने का संदेश देती हैं। भैया-दूज, भाई-दूज या भ्रातृ-द्वितीया भी इसी तरह का एक ऐसा त्यौहार है जिसमें भाई-बहन के रिश्ते को और प्रगाढ़ करने का संदेश है। भैया-दूज की पारम्परिक कथा: मान्यता है कि भैया-दूज का यह त्यौहार यमराज और उनकी बहन यमुना के बीच अटूट प्रेम-सम्बन्ध का प्रतीक है। यमराज जैसे मनुष्यों के अंतकाल (मृत्यु) के 'देवता...