कॉरपोरेट मुनाफों के दौर में क्या बेरोजगारी स्वाभाविक है? दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में सम्पन्न हुए रोजगार अधिकार अभियान के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यतः युवाओं को पहलकदमी कर बेरोजगारी के सवाल पर गम्भीरता से आंदोलन चलाने जरूरत रेखांकित की गई। क्योंकि इतनी विषम बेरोजगारी की परिस्थितियों में भी अगर वे एकजुट नहीं होते तो भविष्य अंधकारमय ही रहना है। यद्यपि राजनीतिक दलों के अपने युवा-बेरोजगार संगठन भी होते हैं लेकिन वे राजनीतिक मजबूरियों के चलते इस मुद्दे पर स्वतंत्र ढंग से काम नहीं कर पाते। सम्मेलन में रेखांकित किया गया कि लोककल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी है कि वह निम्न मसलों को जन पक्षधर तरीके से हल करे: • सुपर रिच पर टैक्स हल करेगा जन सवालों को • सम्मानजनक जीवन सरकार की जिम्मेदारी • देश में संसाधनों की नहीं है कमी • रोजगार अधिकार का कानून बनाया जाए • पूंजी का संकेंद्रण खत्म कर रहा है लोकतंत्र इस सम्मेलन के द्वारा 19 स...
खज्जिनाग का खजियार, हिमाचल हमारे देश में ही नहीं, पूरी दुनिया में मिथकों और दंतकथाओं का वहाँ की संस्कृति के निर्माण में विशेष महत्व है। इन मिथकों और दंतकथाओं को वहाँ की संस्कृति से निकाल दीजिए तो संस्कृति काठ या पत्थर हो जाएगी, उसका आकर्षण छू-मंतर हो जाएगा। हमारे देश में तो इन कथाओं-कहानियों में ही सभ्यता-संस्कृति के प्राण बसते हैं। हिमाचल प्रदेश का चम्बा जिला ऐसी अनेक मिथक कहानियों का खज़ाना है। अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर डलहौज़ी और खज्जियार भी ऐसी अनेक कहानियों को अपने आगोश में समेटे है!! विशेषकर खजियार या खज्जियार का तो जैसे निर्माण ही इन कथाओं से हुआ है। भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहे जाने वाले खजियार के बारे में कई अद्भुत कहानियां हैं जिन्हें यहाँ के निवासी 'इतिहास' मानकर दिल में संजोए हुए हैं। कहते हैं सदियों पहले चम्बा जिला में एक राणे हुए। एक दिन इनकी दृष्टि लिली नामक गाँव के सामने पहाड़ पर पड़ी। वहाँ की ...