मृत्युलोक में नहीं है ब्रजलोक! हालाँकि ब्रज के लोग कभी स्वयं को मृत्युलोक के वासी न मानते थे और न कहलाना पसंद ही करते थे लेकिन इंद्रसभा ने इसे 'मृत्युलोक' घोषित कर रखा था और देवराज इंद्र ने इन्हें मृत्युलोक के वासी ही बनाए रखने का पूरा इंतज़ाम कर रखा था! इंद्रसभा के देवदूत जब यहॉं आते तो यहाँ की खुशहाल जिंदगी को नारकीय बना जाते वे मृत्युलोक की जगह इसे 'नर्कलोक' कहते और मजाक उड़ाते कहते, 'देखो ये हैं नर्कलोक के लोग!' सीधे-सच्चे ब्रजवासी मान भी लेते कि उनकी जिंदगी नर्क बनने के शायद वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं! वे इंद्र के देवदूतों के हर आदेश का पालन करते और इंद्र की प्रार्थना करते हुए कहते कि 'हे देवराज, अबकी वर्षाऋतु में हमारे स्वजनों और गौवंश को बचाए रखना, यमुना देवी के प्रकोप का भाजन हमें न होने देना!..' लेकिन ऐसा शायद ही किसी वर्ष हुआ हो जब वर्षाऋतु के बाद उनके सभी स्वजन और गौवंश सुरक्षित बच निकले हों! अपने से भी अधिक चिंता ब्रजवासियों को अपने गौवंश की होती, क्योंकि गायें और गौवंश उनके ब्रज के जीवन...
कॉरपोरेट मुनाफों के दौर में क्या बेरोजगारी स्वाभाविक है? दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में सम्पन्न हुए रोजगार अधिकार अभियान के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यतः युवाओं को पहलकदमी कर बेरोजगारी के सवाल पर गम्भीरता से आंदोलन चलाने जरूरत रेखांकित की गई। क्योंकि इतनी विषम बेरोजगारी की परिस्थितियों में भी अगर वे एकजुट नहीं होते तो भविष्य अंधकारमय ही रहना है। यद्यपि राजनीतिक दलों के अपने युवा-बेरोजगार संगठन भी होते हैं लेकिन वे राजनीतिक मजबूरियों के चलते इस मुद्दे पर स्वतंत्र ढंग से काम नहीं कर पाते। सम्मेलन में रेखांकित किया गया कि लोककल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी है कि वह निम्न मसलों को जन पक्षधर तरीके से हल करे: • सुपर रिच पर टैक्स हल करेगा जन सवालों को • सम्मानजनक जीवन सरकार की जिम्मेदारी • देश में संसाधनों की नहीं है कमी • रोजगार अधिकार का कानून बनाया जाए • पूंजी का संकेंद्रण खत्म कर रहा है लोकतंत्र इस सम्मेलन के द्वारा 19 स...