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प्रयागराज में हैं तो जरूर देखें!

            प्रयागराज में भी है बना 

              दक्षिण भारतीय मन्दिर


      मध्यकाल का यह शिवाला चमत्कारी है!

जनपद #प्रयागराज की तहसील फूलपुर के अंतर्गत ग्राम पूरे सूरदास #झूँसी स्थित यह प्रसिद्ध 'गंगोली शिवालय' एक अद्भुत #शिवालय है! 'गंगोली शिवाला' नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर #संगम के ईशान कोण पर स्थित है! शिव पुराण के मंत्रों में अभिहित चित्रांकन के अनुसार मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं और उनके वाहनों के चित्र उकेरे गए हैं! 


यह शिवालय उत्तराभिमुख प्रस्तर एवं लखौरी ईंटों से निर्मित चतुर्दिक ऊँचे परकोटे से आवृत है! इसका निर्माण बलुए पत्थर आदि से किया गया है। ऊँचे चबूतरे पर निर्मित शिवालय के चतुर्दिक पददक्षिणापथ के रूप में दो स्तम्भों एवं दो अर्द्धस्तम्भों पर आधारित चौड़ा बरामदा है। बरामदे की बाह्य दीवारों के दोनों कोनों पर रथिकाओं में विविध देवी -देवताओं की मूर्तियाँ रूपांकित हैं। 


शिवालय के गर्भगृह के ऊपर उरुश्रृंगों से अलंकृत नागर शैली पर आधारित पंचरथ शिखर शोभायमान है। इसका शीर्ष आमलक, कलश एवं विजौरा से समलंकृत है।


दक्षिण भारत के मंदिरों जैसे दिखने वाले इस मंदिर की भित्तियों पर उकेरे गए चित्र अपेक्षाकृत अधिक नुकीले और आकर्षक हैं। इसके बावज़ूद ये चित्र दक्षिण भारतीय भित्तिचित्रों के अपेक्षा अधिक सुरक्षित और बहुत कम टूटे-फूटे हैं! मन्दिर के अधिकांश भित्तिचित्र अभी भी अपने मूल रूप में सुरक्षित हैं। इससे यह पता चलता है कि मंदिर निर्माण एवं चित्रों के रूपांकन में इसके संरक्षण को विशेष महत्त्व दिया गया था!


इस गंगोली शिवालय का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में #आगरा के एक ब्राह्मण व्यापारी गंगा प्रसाद तिवारी द्वारा करवाया गया था। मन्दिर स्थापत्य कला एवं मूर्ति कला की दृष्टि से उत्तर भारत के मंदिरों में विशेष महत्त्व रखता है।


मुख्य विशेषताएँ:

★ गंगोली शिवालय संगम के ईशान कोण पर स्थित है!

★ शिव पुराण के मंत्रों में अभिहित चित्रांकन के अनुसार मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं और उनके वाहनों के चित्र उकेरे गए हैं!

★ दक्षिण भारत के मंदिरों जैसे दिखने वाले इस मंदिर की भित्तियों पर उकेरे गए चित्र अपेक्षाकृत अधिक नुकीले और आकर्षक हैं। इसके बावज़ूद ये चित्र दक्षिण भारतीय भित्तिचित्रों के अपेक्षा अधिक सुरक्षित और बहुत कम टूटे-फूटे हैं! 

★ मन्दिर के अधिकांश भित्तिचित्र अभी भी अपने मूल रूप में सुरक्षित हैं। इससे यह पता चलता है कि मंदिर निर्माण एवं चित्रों के रूपांकन में इसके संरक्षण को विशेष महत्त्व दिया गया था!

★ सत्रहवीं शताब्दी में आगरा के ब्राह्मण व्यापारी गंगा प्रसाद तिवारी द्वारा यह मंदिर बनवाया गया।

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