इन्हें बचाओ!... ~ अशोक प्रकाश ये दोनों सच्ची घटनाएं हैं!...आपके आसपास भी घटती होंगी। किन्तु ये आकस्मिक घटनाएं नहीं हैं। ये उस समाज की सच्चाइयाँ हैं जिसके रचयिता भी हम हैं, भोक्ता भी हम हैं। ऐसी व्यवस्था बनाने या बनाए रखने में हमारा भी योगदान है!... पहली घटना एक लड़की की है! इस लड़की की उम्र होगी 18-20 साल। कुुुछ दिन पहले खबर थी कि इसका अपहरण हो गया है। माँ-बाप के साथ सब चिंतित थे। नाते-रिस्तेेेदार, अड़ोसी-पड़ोसी, दोस्त-यार!...क्या हुआ? अभी भी कोई ज़्यादा नहीं जानता! पहले पता चला कि इस शहर से बाहर एक उत्तरी शहर में उसकी लोकेशन मिल रही. उधर कोई इसके रिश्तेदार रहते हैं. लोग गए तो पता लगा क...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.