काले कानून मिट्टी सत्याग्रह किसान आंदोलन का एक अभिनव प्रयोग: मिट्टी सत्याग्रह https://youtu.be/Ml2fxGNdLv8 सत्ता के मद में चूर बड़बोले घमंडोले देश के शासकों को आज लगता है कि किसानों के आंदोलन से उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला! कम से कम किसानों के आंदोलन और अंग्रेज़ी कानूनों से भी खतरनाक लाए गए किसानी सम्बन्धी कानूनों पर अडिग रहने की उनकी हठधर्मिता से यही प्रतीत होता है। पर देश की मिट्टी से जुड़ें करोड़ों सचेत किसानों, मजदूरों, नौजवानों, बुद्धिजीवियों को पता है कि देश की मिट्टी के असली वारिस किसानों को नज़रंदाज़ करने से बड़े से बड़े राजाओं-महाराजाओं, नवाबों-बादशाहों की स्मृतियाँ भी मिट्टी में मिल गई हैं। आज उन्हें नफ़रत और हिक़ारत की नज़र से ही देखा जाता है। देश-दुनिया के किसानों-मजदूरों द्वारा निर्मित की जाने वाली मानव सभ्यता के विकास के वे रोड़े और खलनायक ही माने जाते हैं। कुछ ऐसी ही सोच आज के किसान आंदोलन और दांडी से दिल्ली ...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.