'कब तलक लुटते रहेंगे?..' जी, कल किसका नम्बर है?...आप नहीं जानते?...लेकिन सरकार जानती है, कॉरपोरेट जानता है! इस धरती पर वे अपना अधिकार समझने लगे हैं~ दुनिया के सबसे कामचोर लोग!..बड़े-बड़े शहरों के महलों में रहने वाले लोग! वे खेती की, जंगल की जमीन तय कर रहे हैं कि वह किसकी है!...नहीं, वे तय कर रहे हैं कि यह उनकी नहीं जो सदियों से यहाँ रहते आए हैं बल्कि यह उनकी है जो यहाँ कभी नहीं रहे, कभी नहीं रहेंगे! ये शहरिल्ला लोग सिर्फ़ जल, जंगल, जमीन का सत्त्व चूसना, उसका दोहन कर मुनाफ़ा कूटना जानते हैं। पुलिस-फ़ौज के बल पर ये लोग ऐसे हर व्यक्ति के खिलाफ़ हैं जो आदिवासियों, अपनी धरती पर सदियों से रहते आए समुदायों की बेदख़ली और प्राकृतिक क्षेत्रों को बरबाद करने वालों की चोरी और सीनाजोरी के विरुद्ध जन-जागृति पैदा करता है। कॉमरेड माधुरी भी उन्हीं में से एक हैं। पढ़िए और जानिए हक़ीक़त ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) की विज्ञप्ति के माध्यम से~ हम पुर ज़ोर तरीके से जे.ए.डी.एस JADS नेता माधुरी पर हमले की न...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.