बैंक जाएँ, चाहे सारी दुनिया भक्त कहें बस मन्दिर-मन्दिर! ऐसे ही नहीं गुलाम बना था देश! मुद्रास्फीति 8% है, और बचत पर बैंक की ब्याज दर 4.8% याने घर मे रखने पर पैसा 8% की दर से घटेगा। बैंक में रखो तो 3.2% की दर से घटेगा (8 - 4.8 = 3.2) अब आप मजबूर हैं, बचत का पैसा शेयर मार्केट में को। No other option! शेयर का पैसा कंपनी को जाएगा। डूब गई, तो सारा पैसा गया। 🤷♂️ उधर बैंक ने जो जमा आपसे ली है, वह भी लोन बनकर कम्पनी को जाएगा। अब दिवालिया कानून जो मोदी की सरकार ने बनाया है, वो कहता है कि कम्पनी के मालिकान, कम्पनी डूबने पर सिर्फ उतने पैसे की देनदारी को मजबूर होगा, जितना कि उसकी शेयर कैपिटल है। 🤔 इसे ऐसे समझें - मालिक की 100 करोड़ की शेयर कैपिटल है। 1000 करोड़ आपकी बचत का शेयर मार्किट से उठा लिया। 5000 करोड़ बैंक से आपके पैसे से लोन उठा लिया। लेकिन कम्पनी उसकी देनदारी 100 करोड़ ही रहेगी। याने देशवासियों को लूटकर खा जाने की आजादी नया राष्ट्रवाद है। 😏...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.