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शिक्षक हैं तो...सिखाइए!

                                    शिक्षक हैं तो                            और सीखिए, और सिखाइए!                                                 - अशोक प्रकाश             जीवन एक संघर्ष है और इस संघर्ष को जितना ही मानव-सभ्यता के संघर्ष से जोड़कर हम देखते हैं, उतना ही यह मजेदार लगता है। हमारी तकलीफ़ भी सिर्फ़ हमारी नहीं होती। हमें यह भी पता चलता है कि इसे झेलने वाले हम कोई विरले इंसान नहीं हैं!...           तो फिर इस पर इतना हायतौबा करते हुए जीना कैसा?...          दरअसल, यह जीवन एक विराट और न ख़त्म होने वाली यात्रा की तरह है। यह यात्रा मानव-सभ्यता की विकास-यात्रा है। एक इंसान को  इस यात्रा को हमेशा ही बेहतर और सुखद बनान...

शिक्षक-दिवस पर सम्मान का ढोंग

शिक्षक-दिवस?... क्या शिक्षक-दिवस?                        प्राथमिक शिक्षा और उसके                  शिक्षकों की व्यथा-कथा ! पिछले कुछ वर्षों से शिक्षकों से ही नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति शासक वर्ग का जो रवैया दिखाई दिया है, वह शिक्षकों को सम्मानित करने, शिक्षा को समाजोपयोगी बनाने का नहीं पूँजीपतियों की सेवा करने का रहा है। ऐसे में 5 सितंबर को अपने अग्रणी शिक्षक, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करना शिक्षकों में एक ऐसी भावानुभूति पैदा करता है जिसमें उनकी स्मृतियों के प्रति सम्मान का अतिरेक तो वर्तमान शिक्षा के यथार्थ के प्रति गहरे क्षोभ की अभिव्यक्ति होती है।          पांच सितम्बर, 2019 को पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षक 'प्रेरणा ऐप' को दुष्प्रेरणा ऐब यानी बुरी नीयत से जबरन सेल्फी-प्रशासन लागू करने की कोशिश मानते हुए विरोध-प्रदर्शन एवं धरने पर गए!  शिक्षकों का कहना था कि तथाकथित 'प्रेरणा' ऐप अमेरिकी सर्वर द्वारा संचालित एक ऐसा असुरक्षित ऐप ह...