कॉरपोरेट मुनाफों के दौर में क्या बेरोजगारी स्वाभाविक है? दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में सम्पन्न हुए रोजगार अधिकार अभियान के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यतः युवाओं को पहलकदमी कर बेरोजगारी के सवाल पर गम्भीरता से आंदोलन चलाने जरूरत रेखांकित की गई। क्योंकि इतनी विषम बेरोजगारी की परिस्थितियों में भी अगर वे एकजुट नहीं होते तो भविष्य अंधकारमय ही रहना है। यद्यपि राजनीतिक दलों के अपने युवा-बेरोजगार संगठन भी होते हैं लेकिन वे राजनीतिक मजबूरियों के चलते इस मुद्दे पर स्वतंत्र ढंग से काम नहीं कर पाते। सम्मेलन में रेखांकित किया गया कि लोककल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी है कि वह निम्न मसलों को जन पक्षधर तरीके से हल करे: • सुपर रिच पर टैक्स हल करेगा जन सवालों को • सम्मानजनक जीवन सरकार की जिम्मेदारी • देश में संसाधनों की नहीं है कमी • रोजगार अधिकार का कानून बनाया जाए • पूंजी का संकेंद्रण खत्म कर रहा है लोकतंत्र इस सम्मेलन के द्वारा 19 स...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.