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भगवान कहाँ-कहाँ नहीं हैं?

                भगवान कहाँ हैं?...

                       तुम कहाँ कहाँ हो भगवन!                 




तुम कहाँ कहाँ नहीं हो

जो यहाँ नहीं हैं, वहीं हो

तुम्हें कहाँ कहाँ सब ढूँढें

पेड़ों में, पत्तों में, धागों में

पत्थर में, सिंदूर में,

क्या मन में भी तुमको ढूँढें?


वे कहीं भी हैं मिल जाते

नहीं जहाँ वहाँ भी आते

कितने अजीब है भगवन

हर जगह तुम्हें सब पाते!

🌹🌹🙏❤️🙏🌹🌹

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