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शहीद भगत सिंह: आज और क्यों याद आते हैं?

28 सितम्बर: शहीद भगतसिंह जन्मदिन

                    और ज़्यादा याद आते हैं
            आज  शहीद भगतसिंह




आज शहीदे-आज़म कहे जाने वाले उस भगतसिंह का जन्मदिन है जो मरे नहीं, 23 मार्च को फाँसी के फंदे पर झूलने के बाद और ज़िंदा हो गए!..
एक नया जन्म मिल गया उन्हें!...
पुनर्जन्म नहीं, वह तो किसी का नहीं होता!

28 सितम्बर, 1907! और फिर 23 मार्च 1931.  
आज कितने विद्यार्थी इतनी सी उम्र में शहीद भगत सिंह जितना कुछ पढ़-लिख जाते हैं?... और पढ़ाई भी नौकरी पाने वाली नहीं, देश- एक नया देश, एक नई दुनिया बनाने वाली पढ़ाई!

         जी हाँअभी बार-बार यह दिन याद आएगा, बहुत याद आएगा! देश में, दुनिया में आम जनता के जीवन पर जितना अधिक संकट बढ़ेगा, बढ़ाया जाएगा- उतनी ही तल्ख़ी के साथ यह दिन याद आएगा! शहीद भगत सिंह याद आएंगे, उनके सपने याद आएंगे!...

शोषणविहीन दुनिया का सपना, अत्याचार से मुक्त दुनिया का सपना!...धर्म, जाति, लिंग, क्षेत्र से दूर सच्ची मानवतावादी दुनिया का सपना!

              और साथ ही याद आएंगे शहीद भगत सिंह के आदर्श ब्लादीमिर इलिच लेनिन!.... याद आएगी उनकी क्रांतिकारी विरासत! 
                    

     
             उनके और उनके आदर्शों के दुश्मन आज और ज़्यादा जनता के दुश्मन हैं! वे आज और ज़्यादा जनता को कष्ट देकर अपना और ज़्यादा मुनाफ़ा बढ़ा रहे हैं!

             इसीलिए शहीद भगतसिंह-राजगुरु-सुखदेव आज और ज़्यादा, और तल्ख़ी.....और क्षोभ से याद किए जाते हैं! जन्मदिन पर भी, शहादत दिवस पर भी!



         उनके दुश्मन कुछ नहीं कर सकते, सिवाय जनता की नफ़रत बढ़ाने के....जिस नफ़रत में इन्हें अवश्य ही खाक होना है, उनके वर्ग को खाक होना है!!!

      वे कुछ नहीं कर सकते!....
       सभी चित्र फ़ेसबुक/व्हाट्सएप से साभार!  ★★★

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