Skip to main content

यह संदेश आप सबके लिए है!

                       राजतिलक की करो तैयारी 

                       घर आ रहे हैं..

                18 लाख बैंक कर्मचारी! 


😁😁

बैंको के निजीकरण से 10 लाख नौकरियां खत्म होंगी 

तो उन 10 लाख लोगो को 

अपने परिवार के साथ 30 लाख लोगो को 

सड़कों पर आंदोलन पर होना चाहिए।


BSNL से शुरू हुआ कारवां, 

दिन दूनी रात चौगनी तरक़्क़ी करता हुवा 

आज बैंकों तक पहुँच गया..

नम्बर सबका आएगा

प्रसाद सबको मिलेगा


जब तक दवाई नही तब तक ढिलाई नही।

लगातार हाथ धोते रहिये।

कभी नौकरी से,कभी सैलरी से,

कभी पेंशन से,कभी बिजनेस से

🙄सरकार आपके साथ है😉


रामराज युग में नोट व बैंक नहीं थे,

रेल व हवाई अड्डे नहीं थे, 

BSNL, LIC नहीं थी,

विश्वविद्यालय और न्यायालय नही थे,

तो फिर इन सबके साथ रामराज कैसे स्थापित होगा ??

😍आज बैंक वाले भी हड़ताल पर

किसी को छोड़ना नहीं है 

कोई बचा हो तो, 

सर्च करो और सड़क पर आने दो.


चायवाला बैंक बेच रहा है 

अब बैंक वाले चाय बेचेंगे ।

#BankStrike


एक बार फिर से थाली और परात लेकर

तैयार रहें पता नही कब आदेश आ जाए📯📯

              प्रस्तुति: मुकेश कुमार मयंक,

                  मानव सेवा दल संस्थान

               On  WhatsApp


           #WhatsApp  नेताओं की तरह

            कुछ भी फेंकता नहीं जाता,

             जनता के दिल का संदेश भी

              लाता है!

   #Share if you believe...

   In

    Let Truth Prevail!

                  ◆◆◆◆◆

Comments

Popular posts from this blog

नाथ-सम्प्रदाय और गुरु गोरखनाथ का साहित्य

स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम  परीक्षा की तैयारी नाथ सम्प्रदाय   गोरखनाथ     हिंदी साहित्य में नाथ सम्प्रदाय और                 गोरखनाथ  का योगदान                                                   'ग्यान सरीखा गुरु न मिल्या...' (ज्ञान के समान कोई और गुरु नहीं मिलता...)                                  -- गोरखनाथ नाथ साहित्य को प्रायः आदिकालीन  हिन्दी साहित्य  की पूर्व-पीठिका के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।  रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' की अपेक्षा 'वीरगाथा काल' कहना कदाचित इसीलिए उचित समझा क्योंकि वे सिद्धों-नाथों की रचनाओं को 'साम्प्रदायिक' रचनाएं समझते थे। अपने 'हिंदी साहित्य का इतिहास' ...

सहकारिता या अधिकारिता?..

  #ncp_2025 :                राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025                        एक-एक कर            सब हड़पने की नीति संयुक्त किसान मोर्चा, एसकेएम केंद्र की राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का विरोध क्यों कर रहा है? कई किसान संगठनों का राष्ट्रीय गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा, का दावा है कि एनसीपी 2025 संविधान के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और कृषि में निगमों के पिछले दरवाजे से प्रवेश को सुगम बनाती है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 की किसान संघों ने तीखी आलोचना की है।  संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि यह नीति सहकारी समितियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने का प्रयास करके संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है, जो संवैधानिक रूप से राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। इसके अलावा, एसकेएम का आरोप है कि एनसीपी 2025 में किसानों, श्रमिकों और हाशिए के समुदायों के अधिकारों और आजीविका ...

एक विद्रोही सन्यासी: धर्म का एक अलग चेहरा

               स्वामी सहजानंद सरस्वती:           एक संन्यासी किसान नेता               बहुतों को सुनकर अच्छा नहीं लगेगा और उनका अच्छा न लगना ही सही होगा!.. आज निठल्ले लोगों का एक बड़ा समूह साधुओं-संतों के रूप में पहचाना जाता है। इसलिए नहीं कि वे साधु-संत होते हैं, बल्कि इसलिए कि बिना कोई काम-धाम किए वे दुनिया का हर सुख भोगते हैं। वैसे तो जमाना ऐसा ही है कि बिना काम-धाम किए सुख भोगने वाले ही आज राजकाज के सर्वेसर्वा होते हैं। ऊपर से 18-18 घंटे रोज काम करने वाले माने जाते हैं। ऐशोआराम की तो पूछिए मत! दुनिया का सबसे महंगा कपड़ा, सबसे कीमती जहाज, सबसे बड़ा बंगला ऐसे ही निठल्ले लोगों से सुशोभित होता है पर मजाल क्या कि ऐसे लोगों के असली चरित्र पर टीका-टिप्पणी कीजिए! वो तो 'महान संत' आसाराम बापू जैसे एकाध की पोलपट्टी खुल गई वरना हर पढ़ा-लिखा और अनपढ़ वैसी ही दाढ़ी और वैसी ही गाड़ी के साथ-साथ वैसी ही भक्तमंडली के लिए आहें भरता है। किंतु, आज इन सबसे अलग एक ऐसे शख़्स की बात की जा रही है जिसका जन्मदिन महाशिवर...