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चेतावनी दिवस के मायने

                    किसान संघर्षों के

                   नए आयाम

 
संयुक्त किसान मोर्चा ने 5 जून को सम्पूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर किसानों से आह्वान किया है कि वे देश भर में भाजपा सांसदों, विधायकों के आवासों एवं कार्यालयों के सामने किसान कानूनों की प्रतियाँ जलाकर यह जताएँगे कि किस तरह भाजपा किसान विरोधी है। ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष 5 जून को ही किसान विरोधी कृषि कानून विधेयक के रुप में घोषित हुआ था। यही तिथि जयप्रकाश आन्दोलन के संपूर्ण क्रांति दिवस की भी है। इस संपूर्ण क्रांति दिवस को चेतावनी दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा। चूँकि किसान इस दिन सीधे भाजपा के स्थानीय नेताओं को किसान विरोधी चिह्नित करने का प्रयास करेंगे, भाजपा नेताओं की कार्यशैली के जानकार यह मानते हैं कि वे इसे सहज-सामान्य रूप में संभवतः नहीं लेंगे। ऐसे में भाजपा के विशेष प्रभाव वाले क्षेत्रों में स्थिति असामान्य हो सकती है।

दूसरी तरफ हरियाणा के टोहाना में इकट्ठे हुए किसानों की बैठक में फैसला लिया गया कि आने वाली 7 जून को 11 बजे से 1 बजे तक हरियाणा के सभी पुलिस थानों का घेराव किया जाएगा। जजपा विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को अपशब्द बोले जाने और किसानों पर पुलिस केस दर्ज करने के विरोध में यह फैसला लिया गया है। अगर 7 तारीख तक भी किसानों के खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं होते और विधायक बबली माफी नहीं मानते तो 11 और 12 जून टोहाना के हर गाँव मे विशाल प्रदर्शन किए जाएंगे।

किसान आंदोलन के प्रचार प्रसार में अहम योगदान निभाने वाले टि्वटर अकाउंट ट्रैक्टर टू ट्विटर को एक मीडिया संगठन द्वारा मानहानि का नोटिस भेजा गया है। यह अकाउंट पूर्ण रूप से तथ्यों के आधार पर अपने विचार रख रहा है। इस तरह से मानहानि के नोटिस भेजना किसानों की आवाज दबाने से बराबर है। संयुक्त किसान मोर्चा इस कदम की सख्त निंदा करता है। इस एकाउंट के संबंधित व्यक्ति पूरी कानूनी कार्रवाई में शामिल होंगे और अपना पक्ष रखेंगे।

पिछले दिनों से खराब मौसम के चलते तूफान व बारिश से किसानों के टेंट उखड़ गए थे जिससे किसानों का भारी नुकसान हुआ था। मंगलवार से ही किसानों ने धरनास्थलों पर सफाई करते हुए फिर से प्रबंध करना शुरू कर दिया था। किसान लगातार मेहनत कर अपने रहने व लंगर बनाने का प्रबंध कर रहे है। 

शाहजहांपुर बॉर्डर पर भारी नुकसान के बाद जनसहयोग व जन कल्याण के संगठनों द्वारा किसानों के टेंट व अन्य प्रबंधन किये गए। अब किसानों ने पहले से बेहतर स्थिति में टेंट लगाए हैं व धरना प्रदर्शन जारी रखा है। सरकार के किसानों को हिंसक दिखाने के अनेक प्रयासों के बाद भी किसान शांतमयी प्रदर्शन कर रहे है। 

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान लगातार दिल्ली मोर्चो पर पहुंच रहे है। आज भी सैंकड़ो की संख्या में किसान सिंघू बॉर्डर पहुंचे। किसान नेताओ ने जत्थों का स्वागत करते हुए मोर्चो को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी।

ऐसा लगता है कि किसान अब लंबे संघर्ष की तैयारी में है। पहले किसानों ने 6 महीने की तैयारी की थी पर सरकार किसानों की मांगें नहीं मान रही है। किसानों ने अपनी मांगे माने जाने तक धरना जारी रखने का संकल्प लिया है और सभी तरह के प्रबंध भी कर लिए है। यास तूफान के चलते धरना स्थलों पर टेंटों को जो नुकसान हुआ था उसे भी ठीक कर लिया गया है। साथ ही धरना स्थल पर विशेषकर पंजाब और हरियाणा से नए-नए जत्थों का आना भी जारी है!

                    - संयुक्त किसान मोर्चा के प्रेस-नोट पर आधारित।

                                 ★★★★★★★

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