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एक तस्वीर:

🔴यही मज़बूरी है बड़ी संख्या में हमारे देश के गाँवों/शहरों में रहने वाले गरीब घरों के बच्चों की!...अगर इनके परिवारों को आर्थिक रूप से इतना सबल नहीं बनाया जा सकता कि बाकी मध्यवर्ग की तरह वे इनकी पढ़ाई-लिखाई को ज़्यादा महत्त्व देने लायक हो जाएं, तब तक मध्याह्न भोजन...जूता-कपड़ा से इस दशा में अपेक्षित सुधार नहीं होगा!..
      किसी अध्यापक को बलि का बकरा भले बना दिया जाय, पर अध्यापकों के हाथ में ज़्यादा कुछ नहीं है!...रोटी का गणित इससे जूझते लोगों को संख्याओं के गणित से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण लगेगा ही!!🏼🔴

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