Skip to main content

कविता:




                          🔴    चलो,  लड़ा जाये!....🔴


⚫चलो, लड़ा जाये
कुछ आगे बढ़ा जाये!

तुम मेरा सिर फोड़ो
मैं तुम्हारा
थाने चलें
थानेदार का होगा
वारा-न्यारा...
कुछ नया इतिहास
गढ़ा जाये!

तुम वो हो
मैं ये हूँ
तुम खटिया के
खटमल हो
मैं सिर की
जूं हूँ...
खटमल और जूं पे
चलो, और अड़ा जाए!

इतिहास तुम्हारा भी है
इतिहास हमारा भी
गाय-गोबर और
गोबरधन के साथ
लाते हैं दोनों
भैंस का चारा भी...
बकरी को
चलो, एक डंडा जड़ा जाये!

तुम रोटी खाते हो
में चावल खाता हूँ
तुम्हें सब्ज़ी नहीं मिलती
में दाल नहीं पाता हूँ....
रोटी और दाल का
सब्ज़ी और चावल का
चलो, उल्टा पहाड़ा पढ़ा जाये!

तुमने चोटी
कटवा ली है
मैंने दाढ़ी
मुड़वा ली है
मालिक की मर्ज़ी थी
हमने तो
सिर्फ़ पूरी की है...
थोड़ा-थोड़ा और
चलो, घूरे में सड़ा जाये!

हम बहादुर लोग हैं
लड़ने में बहादुरी है
नौकरी-चाकरी खेती-धंधा
बात बहुत बुरी है....
चीन-पाकिस्तान से
भ्रष्टाचार और बेईमान से
बहुत लड़े....
आपस में अब
चलो, फिर से भिड़ा जाए!⚫

🔴🔴

Comments

Popular posts from this blog

नाथ-सम्प्रदाय और गुरु गोरखनाथ का साहित्य

स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम  परीक्षा की तैयारी नाथ सम्प्रदाय   गोरखनाथ     हिंदी साहित्य में नाथ सम्प्रदाय और                 गोरखनाथ  का योगदान                                                   'ग्यान सरीखा गुरु न मिल्या...' (ज्ञान के समान कोई और गुरु नहीं मिलता...)                                  -- गोरखनाथ नाथ साहित्य को प्रायः आदिकालीन  हिन्दी साहित्य  की पूर्व-पीठिका के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।  रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' की अपेक्षा 'वीरगाथा काल' कहना कदाचित इसीलिए उचित समझा क्योंकि वे सिद्धों-नाथों की रचनाओं को 'साम्प्रदायिक' रचनाएं समझते थे। अपने 'हिंदी साहित्य का इतिहास' ...

सहकारिता या अधिकारिता?..

  #ncp_2025 :                राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025                        एक-एक कर            सब हड़पने की नीति संयुक्त किसान मोर्चा, एसकेएम केंद्र की राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का विरोध क्यों कर रहा है? कई किसान संगठनों का राष्ट्रीय गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा, का दावा है कि एनसीपी 2025 संविधान के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और कृषि में निगमों के पिछले दरवाजे से प्रवेश को सुगम बनाती है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 की किसान संघों ने तीखी आलोचना की है।  संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि यह नीति सहकारी समितियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने का प्रयास करके संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है, जो संवैधानिक रूप से राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। इसके अलावा, एसकेएम का आरोप है कि एनसीपी 2025 में किसानों, श्रमिकों और हाशिए के समुदायों के अधिकारों और आजीविका ...

एक विद्रोही सन्यासी: धर्म का एक अलग चेहरा

               स्वामी सहजानंद सरस्वती:           एक संन्यासी किसान नेता               बहुतों को सुनकर अच्छा नहीं लगेगा और उनका अच्छा न लगना ही सही होगा!.. आज निठल्ले लोगों का एक बड़ा समूह साधुओं-संतों के रूप में पहचाना जाता है। इसलिए नहीं कि वे साधु-संत होते हैं, बल्कि इसलिए कि बिना कोई काम-धाम किए वे दुनिया का हर सुख भोगते हैं। वैसे तो जमाना ऐसा ही है कि बिना काम-धाम किए सुख भोगने वाले ही आज राजकाज के सर्वेसर्वा होते हैं। ऊपर से 18-18 घंटे रोज काम करने वाले माने जाते हैं। ऐशोआराम की तो पूछिए मत! दुनिया का सबसे महंगा कपड़ा, सबसे कीमती जहाज, सबसे बड़ा बंगला ऐसे ही निठल्ले लोगों से सुशोभित होता है पर मजाल क्या कि ऐसे लोगों के असली चरित्र पर टीका-टिप्पणी कीजिए! वो तो 'महान संत' आसाराम बापू जैसे एकाध की पोलपट्टी खुल गई वरना हर पढ़ा-लिखा और अनपढ़ वैसी ही दाढ़ी और वैसी ही गाड़ी के साथ-साथ वैसी ही भक्तमंडली के लिए आहें भरता है। किंतु, आज इन सबसे अलग एक ऐसे शख़्स की बात की जा रही है जिसका जन्मदिन महाशिवर...