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किसानों के इन नारों में है असली कविता

            किसान आंदोलन की कविता                         

1.

जो अन्न – वस्त्र उपजाएगा, अब सो कानून बनाएगा।

भारतवर्ष उसी का है, अब शासन वही चलाएगा। 

                                    ~ सहजानंद सरस्वती

2. 

हम पर न दया करो, न तरस खाओ

हमारा हक़ छीना जा रहा है, हमारे साथ आओ!..

3. 

खाद-बीज-बिजली-डीज़ल-कीटनाशक सब पर

जिनका अधिकार है,

किसान की मेहनत के लुटेरे हैं वे, 

इन मुनाफाखोरों का किसान शिकार है!...

4. 

कॉरपोरेट को अपनी उत्पादन-लागत-मजदूरी के अनुसार मुनाफ़ा जब

तय करने का अधिकार है,

ये कौन सा खेल है भाई, फसल की एमएसपी तक की कानूनी गारंटी के लिए 

देश की सरकार भी नहीं तैयार है?... 

5.

जब किसान को मिलेगी सुनिश्चित आय

कर्जा-मुक्त होंगे जब सभी किसान,

फसल का मिलेगा जब पूरा दाम 

तभी सचमुच होगा किसान का सम्मान!.. 

 6.

विकास का सारा मतलब उलटा
समझाया गया है,

कॉरपोरेट के विकास को किसानों का
विकास बताया गया है!...

7.
ऐसा कब तक 
और क्यूँ चलेगा?

किसी का एंटिला देखकर बेरोजगार किसान

नौजवान कैसे बहलेगा??...

                          ★★★★★★★




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