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हिन्दी काव्य के आधार: विद्यापति, गोरखनाथ, अमीर खुसरो, कबीर एवं जायसी

                             हिन्दी काव्य


 कोरोना-काल के चलते विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में भौतिक रूप से कम कक्षाएं चल पाने के चलते विद्यार्थियों के सामने पाठ्यक्रम पूरा करने की चुनौती तो है ही। साथ ही परीक्षा-उत्तीर्ण करने से ज़्यादा बड़ी चुनौती पूरे पाठ्यक्रम को आत्मसात करने की  है। क्योंकि पता नहीं कि परीक्षाएँ ओएमआर सीट पर वस्तुनिष्ठ हों या विस्तृत-उत्तरीय? विद्यार्थी इस चुनौती का सामना कैसे करें, इसके लिए यहाँ कुछ तरीके बताए जा रहे हैं। इसके पहले के लेख में विद्यार्थियों को समय-सारिणी बनाकर अध्ययन करने की आवश्यकता बताई गई थी। जो विद्यार्थी ऐसा कर रहे होंगे उन्हें इसके लाभ का अनुभव जरूर मिल रहा होगा। यहाँ  आदिकालीन हिन्दी के तीन कवियों- विद्यापति, गोरखनाथ एवं अमीर खुसरो तथा निर्गुण भक्ति काव्य के दो कवियों- कबीर एवं मलिक मोहम्मद जायसी के महत्त्वपूर्ण एवं स्मरणीय बिंदुओं को रेखांकित करने का प्रयास किया जा रहा है। वस्तुतः ये ही हिन्दी विशाल हिन्दी काव्यधारा के आधार कवि हैं जिनकी भावभूमियों पर आगे की कविता का महल खड़ा हुआ है।  उम्मीद है कि विद्यार्थी इसका लाभ भी अवश्य उठाएंगे!

(1) विद्यापति (जन्म1380- निधन 1448 ई.):

मुख्य रचनाएं- 1. विद्यापति 'पदावली' - मैथिली भाषा में (2) 'कीर्तिलता' -राजा कीर्ति सिंह की प्रेमगाथा पर आधारित अवहट्ठ (पुरानी हिन्दी) की रचना (3) 'कीर्ति पताका' अवहट्ठ (पुरानी हिन्दी) की रचना। विद्यापति की भाषा को 'देसिल बयना' नाम से ख्याति प्राप्त है। विद्यापति को 'मैथिल कोकिल' नाम से अलंकृत किया गया है। विद्यापति की अधिकांश रचनाएँ श्रृंगार से ओतप्रोत हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- "विद्यापति के अधिकांश पद श्रृंगार के ही हैं, जिनमें नायिका और नायक राधा-कृष्ण हैं।" कुछ विद्वान विद्यापति के पदों में भक्ति का भी अनुभव करते हैं। किंतु 'विद्यापति श्रृंगारी कवि हैं या भक्त कवि?...' के प्रश्न का उत्तर देने में अधिकांश उन्हें श्रृंगारी कवि ही सिद्ध करते हैं। लेकिन आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार विद्यापति के " पदों ने बंगाल, आसाम और उड़ीसा के वैष्णव भक्तों को खूब प्रभावित किया..."

(2) गोरखनाथ (जन्म- 1050 विक्रमी संवत के लगभग- डॉ पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल, निधन- बारहवीं शताब्दी के प्राम्भ में, जन्म-मृत्यु काल अनिश्चित एवं विवादित):

पुरानी हिंदी या अवहट्ट इन उनकी लगभग 40 कृतियों की चर्चा होती है। यद्यपि इन सभी कृतियों के बारे में सुनिश्चित रूप से नहीं कहा जाता कि ये गोरखनाथ की रचनाएं ही हैं। डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल ने जिन 14 रचनाओं को प्रामाणिक माना है, वे निम्नवत हैं:
1. सबदी
2. पद
3. सिष्या दरसन,
4. प्राण संकली
5. नरवै बोध
6. आत्मबोध
7. अभै मात्रा जोग
8. पन्द्रह तिथि
9. सप्तवार
10. मछीन्द्र गोरखबोध
11. रोमावली
12. ग्यान तिलक
13. पंच मात्रा
14. ग्यान चौंतीसा

इन ग्रंथों में सबदी, पद, प्राण संकली, नरवै बोध, आत्मबोध, मछीन्द्र गोरखबोध, ग्यान तिलक और ग्यान चौंतीसा ग्रंथों से गोरखनाथ के विचारों की विविधता का पता चलता है। और देखें:                   नाथ सम्प्रदाय गोरखनाथ ।

(3) अमीर खुसरो मूल नाम अबुल हसन (जन्म- 1198ई. निधन- 1267 ई.), पटियाली, कासगंज। जलालुद्दीन खिल्ज़ी द्वारा अमीर की उपाधि देने के बाद अमीर खुसरो नाम से मशहूर हुए। मूलतः फारसी के कवि। 'हिंदवी' में लिखी गई रचनाएँ । अरबी एवं फारसी भाषाओं के अलावा 'हिंदवी' भाषा पर भी उनका अधिकार था। उनका कहना था:      ' मैं हिंदुस्तान की तूती हूँ। अगर तुम वास्तव में मुझसे जानना चाहते हो तो हिन्दवी में पूछो।' - हिन्दी साहित्य कोश, भाग 2।

मुख्य रचनाएँ: (1) मल्लोल अनवर (2) शिरीन खुसरो (3) मजनू लैला (4) आईने-ए-सिकन्दरी (5) हश्त विहिश्त । अमीर खुसरो के नाम से हिन्दी भाषा में पहेलियां, मुकरियाँ, दो सूखने और कुछ ग़ज़लें प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा उनके कसीदे, तरजीआत आदि भी उनकी रचनाएँ हैं।

(4) संत कबीर ( जन्म 1398 ई., निधन-1494 या 1498 ई.। 'हिन्दी साहित्य कोश ( भाग-2) में उल्लिखित है:

"1. कबीर जुलाहे थे और वे काशी में निवास करते थे।
2. वे गुरु रामानंद के शिष्य थे।
3. बघेल राजा वीरसिंह देव कबीर के समकालीन थे।
4. सिकन्दरशाह का काशी में आगमन हुआ था और उन्होंने कबीर पर अत्याचार किये थे।
5. कबीर ने 120 वर्ष की आयु पायी।"

'बीजक' नाम से कबीर की रचनाओं का संकलन धर्मदास द्वारा किया गया है किंतु यह संकलन अत्यंत विवादित है और कबीरदास के विचारों के विपरीत पाखण्ड और अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली रचनाओं को भी इसमें कबीर के नाम से स्थान दिया गया है। अतएव, 'श्याम सुंदर दास द्वारा संपादित 'कबीर ग्रन्थावली' में ही सम्मिलित कबीर की साखी, पद और रमैनी को उनकी प्रामाणिक रचनाएँ माना जाता है। इसके अतिरिक्त डॉ. माताप्रसाद गुप्त द्वारा संपादित 'कबीर ग्रन्थावली' को भी कबीर की रचनाओं का प्रामाणिक संग्रह माना जाता है।

(5) मलिक मोहम्मद जायसी ( जन्म 1492 ई., निधन- 1542 ई.- अमेठी में)। उनके जन्म के बारे में निम्न चौपाई मिलती है जिससे पता चलता है कि वे आधुनिक रायबरेली जिले के 'जायस' नगर में ही पैदा हुए थे:
       "जायस नगर मोर अस्थानू। नगरक गाँव आदि उदयानू।।"
                                                -- आखिरी कलाम,10
 
      "अपने जीवन के अंतिम दिनों में ये अमेठी के ही निकट किसी मंगरा नाम के घने जंगल में रहकर अपनी साधना किया करते थे और कहा जाता है कि वहीं रहते समय इन्हें किसी ने शेर की आवाज़ के धोखे में आकर गोली मार दी और इस प्रकार इनका देहांत हो गया।"
              -- हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, पृष्ठ-431

प्रमुख रचनाएँ- (1) पद्मावत (2) अखरावट (3) आखिरी क़लाम

       हिंदी के उपरोक्त पाँच कवि हिन्दी काव्यधारा के आधार स्तम्भ हैं। इनके आधार पर ही आगे की विविध काव्यधाराएँ विकसित होती हैं। इन कवियों से सम्बंधित जिन पाँच प्रमुख प्रश्नों पर बहुधा चर्चा की जाती है, वे हैं:

(1) क्या गोरखनाथ को प्रारम्भिक (आदिकालीन) हिन्दी का प्रथम कवि माना जा सकता है? यदि हाँ तो इसका आधार क्या है?

(2) क्या विद्यापति आदिकालीन कवि कहे जा सकते हैं? यदि हाँ तो विद्यापति की किन मुख्य काव्यगत विशेषताओं के आधार पर?

(3) क्या अमीर खुसरो खड़ी बोली हिन्दी के प्रथम कवि हैं? यदि हाँ तो हिन्दी की मुख्य काव्यधारा में उनका महत्त्व कैसे रेखांकित किया जा सकता है?

(4) हिन्दी का सन्त-काव्य (निर्गुण काव्य) सगुण काव्य का आधार कहा जा सकता है? कबीर की किन विशेषताओं के आधार पर उन्हें अन्य भक्तिकालीन कवियों से अधिक प्रगतिशील माना जाता है?

(5) मसनवी शैली से क्या तात्पर्य है? क्या पद्मावत मसनवी शैली की रचना है? मलिक मोहम्मद जायसी का भक्तिकाव्य में प्रमुख योगदान क्या है?

       हिन्दी की विशाल काव्यधारा को समझने के लिए उपरोक्त प्रश्नों पर विचार आवश्यक है। इन प्रश्नों के उत्तर हमें हिन्दी काव्य की विकसित हुई विविध प्रवृत्तियों के संकेत देते हैं।

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