स्वतंत्रता-पूर्व 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' के प्रमुख लेखक एवं उनके ग्रन्थ 1. गार्सा द तासी: हिंदुस्तानी के प्रोफेसर, जन्म- 1794 ई., निधन-1878 ई., कभी हिंदुस्तान नहीं आए। फ्रांस में ही रहकर हिंदी-उर्दू का मिश्रित इतिहास लिखा। ★ 'इस्तवार द ला लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐन्दुस्तानी' - फ्रेंच भाषा में लिखा गया। हिन्दी में इसका अनुवाद 'हिन्दुई साहित्य का इतिहास' नाम से डॉ. लक्ष्मी सागर वार्ष्णेय द्वारा किया गया है। ★ इसके पहले भाग का प्रकाशन सन् 1839 ई. में और दूसरे भाग का प्रकाशन सन् 1847 ई. में हुआ। ★ इसके तीसरे भाग का प्रकाशन 1871 में हुआ। ★ इस ग्रन्थ में अंग्रेजी के क्रमानुसार हिन्दी साहित्य के कवियों का वर्णन किया गया है। ★ काल-विभाजन नहीं है इस ग्रन्थ में। 2. शिवसिंह सेंगर: ★ हिन्दी में लिखा गया पहला हिन्दी साहित्य का इतिहास - 'शिवसिंह सरोज' शीर्षक से। सन्...
CONSCIOUSNESS!..NOT JUST DEGREE OR CERTIFICATE! शिक्षा का असली मतलब है -सीखना! सबसे सीखना!!.. शिक्षा भी सामाजिक-चेतना का एक हिस्सा है. बिना सामाजिक-चेतना के विकास के शैक्षिक-चेतना का विकास संभव नहीं!...इसलिए समाज में एक सही शैक्षिक-चेतना का विकास हो। सबको शिक्षा मिले, रोटी-रोज़गार मिले, इसके लिए जरूरी है कि ज्ञान और तर्क आधारित सामाजिक-चेतना का विकास हो. समाज के सभी वर्ग- छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान इससे लाभान्वित हों, शैक्षिक-चेतना ब्लॉग इसका प्रयास करेगा.