Skip to main content

उच्च-शिक्षा:

                       उत्तर प्रदेश में उच्च-शिक्षा का खेल
                                 
                                            प्रस्तुति:डॉ. राजेश चन्द्र मिश्र

            विश्वविद्यालयों, अखबार और संचार माध्यमों की विभिन्न सूचनाओं के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग 6000 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय है, किन्तु उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन की अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार 3016 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय हैं! महाविद्यालयों की सुनिश्चित सूचना के अभाव में इनकी संख्या को लेकर कई संदेह और शंकाएँ पैदा होती हैं!...
            कुछ उदाहरणों से इसे समझ जा सकता है:

● इसे उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की पारदर्शिता समझा जाय, या कुछ और
 कि प्रत्येक विश्वविद्यालय और जनपद में स्थित राजकीय और अनुदानित महाविद्यालयों की संख्या में उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश और सम्बन्धित विश्वविद्यालय व जनपद की संख्या में कोई अन्तर नहीं है, जबकि स्ववित्त-पोषित महाविद्यालयों की संख्या में उच्च-शिक्षा विभाग और विभिन्न विश्वविद्यालयों व जनपदवार अंतर मिलता है। ऐसा क्यों है?...इसका कोई सुनिश्चित जवाब न मिल पाना कई शंकाओं को जन्म देता है!...क्या इसके पीछे कोई और खेल है?...

■ उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की DHEUP की अधिकारिक बेवसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल महाविद्यालयों की संख्या :-3482

राजकीय महाविद्यालय- 135

अनुदानित महाविद्यालय- 331

स्ववित्तपोषित महाविद्यालय- 3016

● DHEUP की बेवसाइट के अनुसार अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद में कुल महाविद्यालयों की संख्या :-366

राजकीय महाविद्यालय- 11
अनुदानित महाविद्यालय- 27
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय- 328

★ RMLAU की बेवसाइट के अनुसार अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की अधिकारिक बेवसाइट के अनुसार कुल महाविद्यालयों की संख्या-707

राजकीय महाविद्यालय- 11
अनुदानित महाविद्यालय- 27
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय- 669

● DHEUP की बेवसाइट के अनुसार गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुल महाविद्यालयों की संख्या-190

राजकीय- 05
अनुदानित- 18
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय- 167

★ DDU गोरखपुर की बेवसाइट के अनुसार कुल महाविद्यालयों की संख्या- 245

राजकीय- 05
अनुदानित- 18
स्ववि.महाविद्यालय- 224

● DHEUP बेवसाइट के अनुसार आजमगढ़ में कुल महाविद्यालय-

राजकीय-01
अनुदानित-10
स्ववि.महाविद्यालय-93

★ VBSPU की बेवसाइट के अनुसार आजमगढ़ में-

राजकीय-01
अनुदानित-10
स्ववि.महाविद्यालय-165

● DHEUP की बेवसाइट के अनुसार जौनपुर में-

राजकीय-00
अनुदानित-14
स्ववि.महाविद्यालय-86

★ VBSPU की बेबसाइट के अनुसार-

राजकीय-00
अनुदानित-14
स्ववि.महाविद्यालय-141

● DHEUP के अनुसार गाजीपुर में -

राजकीय-03
अनुदानित-08
स्ववि.महाविद्यालय-103

★VBSPU के अनुसार गाजीपुर में :-

राजकीय-03
अनुदानित -08
स्ववि.महाविद्यालय-224 आदि...

         ये उदाहरण बताते हैं कि कुछ न कुछ गड़बड़झाला जरूर है! आखिर, ऐसा क्या है कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की संख्या आज की तिथि में उच्च शिक्षा विभाग कुछ और बताता है और विश्वविद्यालय कुछ और!?...जवाब में मिर्ज़ा ग़ालिब की ये पंक्तियाँ ही मन में उभरती हैं- 'या इलाही ये माज़रा क्या है!'...

                                      ●●◆●●

Comments

Popular posts from this blog

नाथ-सम्प्रदाय और गुरु गोरखनाथ का साहित्य

स्नातक हिंदी प्रथम वर्ष प्रथम  परीक्षा की तैयारी नाथ सम्प्रदाय   गोरखनाथ     हिंदी साहित्य में नाथ सम्प्रदाय और                 गोरखनाथ  का योगदान                                                   'ग्यान सरीखा गुरु न मिल्या...' (ज्ञान के समान कोई और गुरु नहीं मिलता...)                                  -- गोरखनाथ नाथ साहित्य को प्रायः आदिकालीन  हिन्दी साहित्य  की पूर्व-पीठिका के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।  रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' की अपेक्षा 'वीरगाथा काल' कहना कदाचित इसीलिए उचित समझा क्योंकि वे सिद्धों-नाथों की रचनाओं को 'साम्प्रदायिक' रचनाएं समझते थे। अपने 'हिंदी साहित्य का इतिहास' ...

सहकारिता या अधिकारिता?..

  #ncp_2025 :                राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025                        एक-एक कर            सब हड़पने की नीति संयुक्त किसान मोर्चा, एसकेएम केंद्र की राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का विरोध क्यों कर रहा है? कई किसान संगठनों का राष्ट्रीय गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा, का दावा है कि एनसीपी 2025 संविधान के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और कृषि में निगमों के पिछले दरवाजे से प्रवेश को सुगम बनाती है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 की किसान संघों ने तीखी आलोचना की है।  संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि यह नीति सहकारी समितियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने का प्रयास करके संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है, जो संवैधानिक रूप से राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। इसके अलावा, एसकेएम का आरोप है कि एनसीपी 2025 में किसानों, श्रमिकों और हाशिए के समुदायों के अधिकारों और आजीविका ...

मुर्गों ने जब बाँग देना छोड़ दिया..

                मत बनिए मुर्गा-मुर्गी! एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया।.. एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उस ने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, "तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मै तुम्हें मार डालूँगा।"  मुर्गे ने कहा, "ठीक है, सर, जो भी आप चाहते हैं, वैसा ही होगा !" सुबह , जैसे ही मुर्गे के बाँग का समय हुआ, मालिक ने देखा कि मुर्गा बाँग नहीं दे रहा है, लेकिन हमेशा की तरह, अपने पंख फड़फड़ा रहा है।  मालिक ने अगला आदेश जारी किया कि कल से तुम अपने पंख भी नहीं फड़फड़ाओगे, नहीं तो मैं वध कर दूँगा।  अगली सुबह, बाँग के समय, मुर्गे ने आज्ञा का पालन करते हुए अपने पंख नहीं फड़फड़ाए, लेकिन आदत से, मजबूर था, अपनी गर्दन को लंबा किया और उसे उठाया।  मालिक ने परेशान होकर अगला आदेश जारी कर दिया कि कल से गर्दन भी नहीं हिलनी चाहिए। अगले दिन मुर्गा चुपचाप मुर्गी बनकर सहमा रहा और कुछ नहीं किया।  मालिक ने सोचा ये तो बात नहीं बनी, इस बार मालिक ने भी कुछ ऐसा सोचा जो वास्तव में मुर्गे के लिए नामुमकिन था। मालिक ने कहा कि कल...