कालिकन धाम की माँ कालिका और च्यवन ऋषि प्राचीन अवध प्रांत अपने महान राजाओं और भगवान श्रीराम के कारण से विशेष प्रसिद्ध रहा है। उसकी प्रसिद्धि का एक अन्य कारण गांव-गांव, छोटे-मोटे नगरों में विविध मंदिरों का होना भी है। ये मंदिर प्रायः स्थानीय या ग्राम-देवियों/देवताओं के केंद्र हैं। ग्रामीण जनता के लिए ये धार्मिक आस्था/प्रार्थना-केंद्र, शांतिस्थल, मेलाकेन्द्र आदि के रूप में रहे हैं। इन्हीं मंदिरों में एक विशिष्ट मन्दिर आधुनिक अमेठी जनपद/नगर से 12 किलोमीटर दूर संग्रामपुर में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इसे कालिकन धाम मन्दिर के नाम से जाना जाता है। लोगों की मान्यता है कि यहाँ की कालिका माँ के दर्शन मात्र से ही भक्तों की हर इच्छा पूरी हो जाती है। नवरात्रि आने पर तो माँ के मंदिर को विशेष रूप से सजाकर तैयार किया जाता है। मां कालिकन मंदिर अपने चमत्कार के लिए जाना जाता है। यह धाम अमेठी के संग्रामपुर ब्लॉक के भौंसिंह पुर गाँव में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहां मौजूद कुंड में स्नान करने से आंखों से...
#ncp_2025 : राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 एक-एक कर सब हड़पने की नीति संयुक्त किसान मोर्चा, एसकेएम केंद्र की राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का विरोध क्यों कर रहा है? कई किसान संगठनों का राष्ट्रीय गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा, का दावा है कि एनसीपी 2025 संविधान के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और कृषि में निगमों के पिछले दरवाजे से प्रवेश को सुगम बनाती है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 की किसान संघों ने तीखी आलोचना की है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि यह नीति सहकारी समितियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने का प्रयास करके संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है, जो संवैधानिक रूप से राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। इसके अलावा, एसकेएम का आरोप है कि एनसीपी 2025 में किसानों, श्रमिकों और हाशिए के समुदायों के अधिकारों और आजीविका ...